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धान खरीद नीति से किसानों की फूलने लगी है सांस
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मऊ। ‘दिन भर चले अढ़ाई कोस’ की तर्ज पर शासन की धान खरीद नीति से किसानों की सांस फूलने लगी है। जिले के अधिकांश क्रय केंद्रों पर किसानों से खरीदा गया धान डंप पड़ा है। धान का उठान न होने से खरीद ठप चल रही है। विपणन विभाग के 14 क्रय केंद्रों पर क्रय केंद्र प्रभारियों की हड़ताल के चलते क्रय केंद्रों पर ताला लटका है। अभी तक विभाग की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ठंड के मौसम में किसानों को अपनी जान को जोखिम में डालकर क्रय केंद्रों पर धान से लदी ट्रॉलियों की रखवाली करनी पड़ रही है।
किसानों को धान की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए धान खरीद योजना शुरू की गई है। कई वर्षो से योजना का लाभ न मिल पाने से किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। जिले में खाद्य एवं विपणन विभाग, पीसीएफ, एफसीआई, मंडी समिति के 47 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं। शासन की तरफ से 41200 एमटी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समय सीमा में दो माह बचा है, लेकिन अभी तक लगभग 16129.11 एमटी ही हो सका है।
क्रय एजेंसियों की तरफ से समय से धान का उठान न करने से क्रय केंद्रों के गोदाम धान से भरे पड़े हैं। धान खरीद बंद होने से आढ़तियों की चांदी कट रही है। किसानों की फसल को औने पौने दाम में खरीद रहे हैं। किसानों की मानें तो क्रय केंद्र प्रभारी पांच से 10 प्रतिशत धान की कटौती कर रहे हैं। मना करने पर खरीद करने से मना कर दे रहे हैं। किसानों की शिकायत के बाद भी आला अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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धीमी गति से सीएमआर भेज रहे मिलर
मऊ। जिले के सभी क्रय एजेंसियों की तरफ से धान की ढुलाई के लिए वाहनों को अनुबंधित किया गया है। इसके बाद भी उठान नहीं हो पा रहा है।अनुबंधित आठ मिलरों द्वारा धीमी गति से सीएमआर भेजने से उठान में समस्या आ रही है।नए नियम के तहत मिलर जितना सीएमआर भेजेंगे उसी के अनुपात में धान खरीद होगी।
धान क्रय केंद्रों पर मनमाने तरीके से हो रही कटौती
मऊ। क्रय एजेंसियों के अधिकारियों की मनमानी से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। किसानों की मानें तो किसान अपना धान जब क्रय केंद्रों पर ले जाता है तो क्रय केंद्र प्रभारी धान में कमी बताकर बैरंग लौटा दे रहा है। कुछ किसान का खरीदा भी जाता है तो पाच से 10 प्रतिशत कटौती कर ली जाती है। जबकि आढ़तिया उसी मजबूर किसान से उसका कागजात आदि लेकर धान लेकर क्रय केंद्र लेकर जाता है तो धान खरीद लिया जा रहा है।
इस संबंध में किसान नेता राकेश सिंह, किसान नेता देव प्रकाश राय का कहना है कि क्रय केंद्र प्रभारियों द्वारा मनमाने तरीके से धान खरीद में पांच से 10 प्रतिशत कटौती कर ली जा रही है। किसानों से कम दाम पर लेकर उन्हीं का कागजात लेकर वही धान क्रय केंद्रों पर बेच दे रहे हैं। शिकायत के बाद भी मामले की जांच तक नहीं कराया जा सका है। किसान संजय सिंह, रविंद्र यादव, सुरेंद्र राय का कहना है कि प्रति क्रय केंद्र पर विपणन विभाग के क्रय केंद्र पर 600 क्विंटल धान खरीद का नियम है। लेकिन एक दो किसान से खरीदकर इतिश्री कर ली जाती है। जबकि बैक डोरसे बिचौलियों से खरीद कर लिया जा रहा है। किसानों को सर्द भरी रात में जान जोखिम में डालकर रखवाली करनी पड़ रहा है। मामले का अविलंब निस्तारण नहीं किया गया तो हम लोग आंदोलन तेज करने को बाध्य हो जाएंगे।
इस मामले में जिला अपर अधिकारी बीपी सिंह ने बातया कि धान खरीद में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। औचक निरीक्षण मेें खामियां मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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किसानों को धान की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए धान खरीद योजना शुरू की गई है। कई वर्षो से योजना का लाभ न मिल पाने से किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। जिले में खाद्य एवं विपणन विभाग, पीसीएफ, एफसीआई, मंडी समिति के 47 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं। शासन की तरफ से 41200 एमटी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समय सीमा में दो माह बचा है, लेकिन अभी तक लगभग 16129.11 एमटी ही हो सका है।
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क्रय एजेंसियों की तरफ से समय से धान का उठान न करने से क्रय केंद्रों के गोदाम धान से भरे पड़े हैं। धान खरीद बंद होने से आढ़तियों की चांदी कट रही है। किसानों की फसल को औने पौने दाम में खरीद रहे हैं। किसानों की मानें तो क्रय केंद्र प्रभारी पांच से 10 प्रतिशत धान की कटौती कर रहे हैं। मना करने पर खरीद करने से मना कर दे रहे हैं। किसानों की शिकायत के बाद भी आला अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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धीमी गति से सीएमआर भेज रहे मिलर
मऊ। जिले के सभी क्रय एजेंसियों की तरफ से धान की ढुलाई के लिए वाहनों को अनुबंधित किया गया है। इसके बाद भी उठान नहीं हो पा रहा है।अनुबंधित आठ मिलरों द्वारा धीमी गति से सीएमआर भेजने से उठान में समस्या आ रही है।नए नियम के तहत मिलर जितना सीएमआर भेजेंगे उसी के अनुपात में धान खरीद होगी।
धान क्रय केंद्रों पर मनमाने तरीके से हो रही कटौती
मऊ। क्रय एजेंसियों के अधिकारियों की मनमानी से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। किसानों की मानें तो किसान अपना धान जब क्रय केंद्रों पर ले जाता है तो क्रय केंद्र प्रभारी धान में कमी बताकर बैरंग लौटा दे रहा है। कुछ किसान का खरीदा भी जाता है तो पाच से 10 प्रतिशत कटौती कर ली जाती है। जबकि आढ़तिया उसी मजबूर किसान से उसका कागजात आदि लेकर धान लेकर क्रय केंद्र लेकर जाता है तो धान खरीद लिया जा रहा है।
इस संबंध में किसान नेता राकेश सिंह, किसान नेता देव प्रकाश राय का कहना है कि क्रय केंद्र प्रभारियों द्वारा मनमाने तरीके से धान खरीद में पांच से 10 प्रतिशत कटौती कर ली जा रही है। किसानों से कम दाम पर लेकर उन्हीं का कागजात लेकर वही धान क्रय केंद्रों पर बेच दे रहे हैं। शिकायत के बाद भी मामले की जांच तक नहीं कराया जा सका है। किसान संजय सिंह, रविंद्र यादव, सुरेंद्र राय का कहना है कि प्रति क्रय केंद्र पर विपणन विभाग के क्रय केंद्र पर 600 क्विंटल धान खरीद का नियम है। लेकिन एक दो किसान से खरीदकर इतिश्री कर ली जाती है। जबकि बैक डोरसे बिचौलियों से खरीद कर लिया जा रहा है। किसानों को सर्द भरी रात में जान जोखिम में डालकर रखवाली करनी पड़ रहा है। मामले का अविलंब निस्तारण नहीं किया गया तो हम लोग आंदोलन तेज करने को बाध्य हो जाएंगे।
इस मामले में जिला अपर अधिकारी बीपी सिंह ने बातया कि धान खरीद में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। औचक निरीक्षण मेें खामियां मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।