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Mau News: चार बीघे जमीन पर दर्ज 52 लोगों का नाम निरस्त करने का आदेश
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मऊ। सदर तहसील क्षेत्र के रतनपुरा गांव में चार बीघे पोखरी जमीन से 52 लोगों का नाम निरस्त कर पोखरी के नाम दर्ज करने का आदेश जारी हुआ है। रतनपुरा निवासी मनोज कुमार गुप्ता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अपर उपजिलाधिकारी ने फैसला सुनाया और तहसीलदार सदर को पोखरी के नाम से पूरी जमीन दर्ज करने का निर्देश दिया है।
आदेश में लिखा कि रतनपुरा ग्राम पंचायत के खाता संख्या 514 की गाटा संख्या 250 के रकबा 0.437 हेक्टेयर पर ग्रामसभा संपत्ति दर्ज रही है। पोखरी, भीटा, जंगल आदि की जमीन पर उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 132 एवं वर्तमान समय में प्रभावी उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 77 की भूमि है। इसके तहत सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी व्यक्ति का अधिकार नहीं हो सकता है। मनोज कुमार गुप्ता ने वर्ष 2021 में जिलाधिकारी को शिकायत कर बताया था कि गांव के ही कुछ लोगों ने पोखरी की जमीन को कूटरचित तरीके से सरकारी अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करा लिया है।
इसके साथ ही धीरे धीरे बहुमंजिला मकान भी बन गए हैं। एक महिला ने तो सरकारी जमीन किसी दूसरे को बैनामा कर दिया है। इस मामले में तहसीलदार सदर को जांच के लिए भेजा गया था। तहसीलदार सदर ने 23 जून 2021 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि पहले के सरकारी अभिलेखों के मुताबिक पूरा रकबा पोखरी के खाते की भूमि है, जिसे ग्रामीणों ने गलत तरीके से विधि विरुद्ध कार्यवाही करते हुए अपना नाम अभिलेख में दर्ज करा लिया है।
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आदेश में लिखा कि रतनपुरा ग्राम पंचायत के खाता संख्या 514 की गाटा संख्या 250 के रकबा 0.437 हेक्टेयर पर ग्रामसभा संपत्ति दर्ज रही है। पोखरी, भीटा, जंगल आदि की जमीन पर उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 132 एवं वर्तमान समय में प्रभावी उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 77 की भूमि है। इसके तहत सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी व्यक्ति का अधिकार नहीं हो सकता है। मनोज कुमार गुप्ता ने वर्ष 2021 में जिलाधिकारी को शिकायत कर बताया था कि गांव के ही कुछ लोगों ने पोखरी की जमीन को कूटरचित तरीके से सरकारी अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करा लिया है।
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इसके साथ ही धीरे धीरे बहुमंजिला मकान भी बन गए हैं। एक महिला ने तो सरकारी जमीन किसी दूसरे को बैनामा कर दिया है। इस मामले में तहसीलदार सदर को जांच के लिए भेजा गया था। तहसीलदार सदर ने 23 जून 2021 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि पहले के सरकारी अभिलेखों के मुताबिक पूरा रकबा पोखरी के खाते की भूमि है, जिसे ग्रामीणों ने गलत तरीके से विधि विरुद्ध कार्यवाही करते हुए अपना नाम अभिलेख में दर्ज करा लिया है।
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