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आपत्तियों का आरक्षण सूची पर नहीं पड़ा असर
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 16 Sep 2015 12:26 AM IST
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद मांगी गई आपत्तियों से सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया। हर कोई सूची में अपनी शिकायतों के मुताबिक आरक्षण में बदलाव की उम्मीद लगाए हुए था, लेकिन पूर्व की यथावत सूची देखकर सभी के चेहरे मुरझाए नजर आए।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पहले जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत के चुनाव की संभावना को लेकर जिला पंचायत विभाग ने छह सितंबर को आरक्षण की सूची जारी की थी। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद चुनाव लड़ने वाले कई लोग जो पहले से ही अपनी सीट को अपने मुताबिक मानकर तैयारी में लगे थे झटका लगा था।
प्रशासन ने भी जारी आरक्षण सूची पर आपत्ति डालने का समय दिया था। सभी सीटों पर सैकड़ों आपत्तियां भी पड़ी थी। मंगलवार को ही आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद से फिर से फाइनल सूची जारी की जानी थी। इसे लेकर सुबह से लोगों में उत्सुकता थी कि कहीं आपत्तियों का लाभ उन्हें मिला है कि नहीं।
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सिर्फ शिकायत कर्ताओं को ही नहीं बल्कि अन्य चुनाव लड़ने वाले इच्छुक लोगों में भी इस बात की शंका आशंका बनी हुई थी कि कहीं उनके वार्ड के आरक्षण की स्थिति गड़बड़ाई तो उनके राजनीतिक समीकरण कहीं बन बिगड़ न जाएं।
इसे लेकर सुबह से ही लोग एक दूसरे के मोबाइल से लेकर विकास भवन के जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में दुबारा सूची के चस्पा होने की बाट जोहते रहे। देर शाम को प्रशासन ने सूची जारी की तो शिकायत कर्ताओं के सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी डीपी शर्मा का कहना है कि शिकायतों के निस्तारण में सबसे बड़ी बात यह थी कि वह निराधार थी।
किसी भी सीट पर आई शिकायतें मानक को चुनौती नहीं दे रही थी कि किसी सीट पर आरक्षण का विचार किया जाए। इसके चलते पुरानी सूची को ही मानक के अनुरूप जो सही बनाई गई थी उसे ही दुबारा चस्पा कर दी गई। किसी भी सीट पर कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पहले जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत के चुनाव की संभावना को लेकर जिला पंचायत विभाग ने छह सितंबर को आरक्षण की सूची जारी की थी। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद चुनाव लड़ने वाले कई लोग जो पहले से ही अपनी सीट को अपने मुताबिक मानकर तैयारी में लगे थे झटका लगा था।
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प्रशासन ने भी जारी आरक्षण सूची पर आपत्ति डालने का समय दिया था। सभी सीटों पर सैकड़ों आपत्तियां भी पड़ी थी। मंगलवार को ही आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद से फिर से फाइनल सूची जारी की जानी थी। इसे लेकर सुबह से लोगों में उत्सुकता थी कि कहीं आपत्तियों का लाभ उन्हें मिला है कि नहीं।
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सिर्फ शिकायत कर्ताओं को ही नहीं बल्कि अन्य चुनाव लड़ने वाले इच्छुक लोगों में भी इस बात की शंका आशंका बनी हुई थी कि कहीं उनके वार्ड के आरक्षण की स्थिति गड़बड़ाई तो उनके राजनीतिक समीकरण कहीं बन बिगड़ न जाएं।
इसे लेकर सुबह से ही लोग एक दूसरे के मोबाइल से लेकर विकास भवन के जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में दुबारा सूची के चस्पा होने की बाट जोहते रहे। देर शाम को प्रशासन ने सूची जारी की तो शिकायत कर्ताओं के सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी डीपी शर्मा का कहना है कि शिकायतों के निस्तारण में सबसे बड़ी बात यह थी कि वह निराधार थी।
किसी भी सीट पर आई शिकायतें मानक को चुनौती नहीं दे रही थी कि किसी सीट पर आरक्षण का विचार किया जाए। इसके चलते पुरानी सूची को ही मानक के अनुरूप जो सही बनाई गई थी उसे ही दुबारा चस्पा कर दी गई। किसी भी सीट पर कोई बदलाव नहीं हुआ है।