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आयुर्वेदिक और युनानी पद्धति से पंजीकरण करा धड़ल्ले से चला रहें नर्सिंग होम

Mon, 21 Sep 2020 11:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 11:21 PM IST
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Nursing homes run by Ayurvedic and Unani system
यूं तो जिले में झोलाछाप की गिनती ही नहीं है, कहीं किसी डाक्टर के यहां प्रैक्टिस करने के बाद किसी चट्टी चौराहें पर क्लीनिक खोल कर बैठ जा रहें। लेकिन सबसे विकट समस्या उन अस्पतालों से उत्पन्न हो रही, जो पंजीकृत आयुर्वेद और युनानी में है, लेकिन मरीजों का उपचार एलोपैथ पद्धति से कर रहें। इन अस्पतालों पर कार्रवाई तभी हो पा रही, जब मरीज अस्पताल के विरुद्घ शिकायत दर्ज कराते है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दो डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है, जो शिकायत मिलने पर समय समय पर अस्पतालों और झोलाछाप डाक्टरों के विरुद्घ कार्रवाई करती रहती है।
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सीएमओ कार्यालय के आंकड़े के हिसाब से जिले एलोपैथ पद्धति से लोगों का उपचार कराने के लिए कुल 126 पंजीकरण है। इसमें महज 36 नर्सिंग होम है। शेष 90 में 72 प्राइवेट ओपीडी और 18 पैथालॉजी का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इसीक्रम में क्षेत्रीय आयुर्वेद युनानी अधिकारी कार्यालय से 318 नर्सिंग होमों का पंजीकरण किया गया है। इसमें आयुर्वेदिक पद्धति से 178 और युनानी पद्धति से लोगों का उपचार कराने के लिए 140 नर्सिंग होम शामिल है। लेकिन ये नर्सिंग होम आयुर्वेदिक और युनानी पद्धति से पंजीकरण कराने के उपरांत लोगों का उपचार एलोपैथ की प्रैक्टिस करते है। ये अस्पताल कभी कभी विकट स्थिति उत्पन्न कर दें रहें। बीते दिनों कोपागंज और हलधरपुर थाना क्षेत्र में घटी घटनाएं इसका ताजा उदाहरण है। आयुर्वेद और युनानी पद्धति से मरीजों का उपचार करने वाले इस पद्धति का उपयोग कम एलोपैथ का उपयोग ज्यादा कर रहें। इसके चलते जांच टीम इन अस्पतालों के विरुद्घ कोई कार्रवाई नहीं कर पातें हैं।
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सीएमओं डा. सतीशचंद्र सिंह की मांने तो आयुर्वेदिक पद्धति के डाक्टरों को 14 एलोपैैैथ की दवा की प्रैक्टिस पर छुट दी गई है। लेकिन वो आईवी सेट का प्रयोग नही कर सकते। लेकिन ये पंजीकरण की आड़ में धड़ल्ले से एलोपैथ की दवाओं का प्रयोग कर मरीजों का उपचार करते हैं। ऐसे में इन अस्पतालों के खिलाफ तभी कार्रवाई हो पाती है, जब उनके विरुद्घ मरीज शिकायत करते हैं।
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झोलाछाप डाक्टरों पर समय समय पर होती है कार्रवाई
मऊ। जिले में हर चट्टी चौराहों पर संचालित झोला छाप डाक्टरों की क्लीनिक के विरुद्घ कार्रवाई करने के लिए सीएमओ ने दो डिप्टी सीएमओं की निगरानी में टीम गठित किया है। यह टीम समय समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई करती रहती है। सीएमओं ने डा. एससी सिंह ने बताया कि नियम के तहत पहले नोटिस दिया जाता है, इसमें समय सीमा तय होती है। इसके बाद कार्रवाई की जाती है। इस वर्ष 12 झोला छाप डाक्टरों को नोटिस जारी की जा चुकी है। बोले तीन रिपोर्ट भी दर्ज कराए गए हैं।

पहले भी आईकॉन हास्पिटल को दी गई थी नोटिस
मऊ। सितंबर माह के पहले सप्ताह में तत्कालीन डीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के प्रयास से जिस आईकॉन अस्पताल के विरुद्घ मुकदमा दर्ज किया गया। उसको स्वास्थ्य विभाग ने बीते वर्ष 2019 में नोटिस जारी किया था। इस दौरान उसके अस्पताल को सीज किया गया था। लेकिन बाद में वह खोलकर पुन: संचालित करने लगा था। इस बार भी नोटिस देकर सीज किया गया। साथ ही मरीज के प्रार्थना पत्र पर जांच कराकर रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
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