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आलू भंडारण का पर्याप्त इंतजाम नहीं

Fri, 11 Jan 2019 10:02 PM IST
mau Published by: पवन सिंह Updated Fri, 11 Jan 2019 10:02 PM IST
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Not enough storage of potato storage
potato storage
 जिले में इस साल आलू का उत्पादन 18 हजार मीट्रिक टन होने की उम्मीद है। लेकिन इनमे से सिर्फ 1500 मीट्रिक टन ही भंडारण की ही व्यवस्था है। जगह के अभाव में हर साल 30 प्रतिशत आलू सड़कर नष्ट हो जाते हैै। हर साल इस समस्या से जूझने के बाद भी उद्यान विभाग भंडारण क्षमता को बढ़ाने में रुचि नहीं ले रहा।
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 उद्यान विभाग की मानें तो इस वर्ष जिले में 1400 हेक्टयर में आलू बोया गया है। जिससे लगभग 18 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होने की उम्मीद है। जबकि जिले आलू के भंडारण की व्यवस्था 1500 मीट्रिक टन की ही है। इसके विपरीत जिले में चालू दो कोल्ड स्टोरेज की क्षमता क्रमश: साढे सात सौ मीट्रिक टन के हिसाब से 1500 मीट्रिक टन की है, जबकि जिला मुख्यालय स्थित सरकारी कोल्ड स्टोरेज बंद हैं। ऐसे में दोनों कोल्ड स्टोरों में 1500 मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया जा सकता है। शेष करीब साढ़े 16  हजार मीट्रिक टन आलू के रखने की कोई व्यवस्था नही है और न ही दिशा में विभाग की तरफ से कोई पहल की गई है।
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 जिले में सर्वाधिक दिक्कत जिले के घोसी क्षेत्र के अमिला, दोहरीघाट, बड़राव क्षेत्र के किसानों को उठानी पड़ती है। कारण यह कि जो दो कोल्ड स्टोर चालू है, वे पहले उन किसानों का आलू भंडारण कर रहे है, जो उनके यहां पूर्व में भी रखते थे। उनका कहना है कि पुराने ग्राहकों का आलू रखने के बाद यदि जगह बचेगी तभी नए ग्राहकों का आलू रखा जाएगा।
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परदहां ब्लाक के बगली पिजड़ा गांव निवासी रामाशीष सिंह ने बताया कि उत्पादन के बाद सरकार द्वारा आलू खरीद की कोई व्यवस्था नहीं है। भंडारण की व्यवस्था बेहतर न होन से इसे औने पौने दाम पर बेचना पड़ता है।


रकौली गांव निवासी विजय सिंह ने कहा कि बीते वर्ष उनके द्वारा दो बीघा में आलू की खेती की गई, लेकिन भंडारण की समस्या आड़े आई। उन्हें भी सस्ते दाम पर आलू बेचे। बीते वर्ष के नुकसान को देखते इस साल उन्होंने आलू की खेती कम कर दी। बताया कि बाहर के जिलों में आलू ले जाने में खर्च अधिक आएगा। लिहाजा वह इतनी ही खेती करेंगे। जितने में नुकसान न हो सके।
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