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खोदी गई पोखरियों में पानी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:13 PM IST
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मझवारा के पौनी गांव में सूखी पोखरी।
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जल संचयन के लिए मनरेगा के तहत लाखों की लागत से खोदी गई पोखरियां शो पीस बनकर रह गई है। खोदी गई पोखरियों की ऐसी बनावट की गई है कि बरसात का पानी पोखरियों में न जाकर इधर उधर बह जा रहा है। जल संचयन के लिए खोदी गई पोखरियों में धूल उड़ रही है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि नहर के समीप खोदी गई पोखरियों में भी पानी भरे जाने की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
जिले में 684 ग्राम पंचायतें हैं। भूगर्भ जल स्तर को बनाए रखने के लिए सभी गांवों में मनरेगा के तहत लाखों की लागत से आदर्श जलाशय तथा पोखरियों की खुदाई कराया गया है। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो गत वर्ष 2016 में 619 पोखरियां खुदवाई गई हैं। जबकि वर्ष 2017 में 150 पोखरियों खुदाई का लक्ष्य रखा गया है। वहीं आदर्श जलाशय योजना के तहत भी प्रत्येक गांवों में एक पोखरियों की खुदाई कराई जा चुकी है। भारी भरकम धनराशि खर्च होने के बाद भी सरकारी मंशा सफल होती नजर नहीं आ रही है। बरसात का पानी तथा लोगों के घरों का पानी पोखरियों में जाता ही नहीं है। इधर उधर बह जाता है। नियमों को ताक पर रखकर पोखरी खुदाई कर इतिश्री कर ली गई है।
प्रतिवर्ष पोखरियों के मरम्मत के नाम पर हजारों रुपये खर्च कर हजम कर लिया जाता है। आम लोगों को पानी की उपलब्धता तथा जल संचयन की दृष्टि से प्रशासन की ओर से नहरों के समीप पोखरियों में पानी भरने का निर्देश भी दिया गया है। विभागीय लापरवाही की स्थिति है कि लंबे समय से अधिकांश पोखरियों तथा आदर्श जलाशयों में धूल उड़ रही है। बरसात के पानी को रिचार्ज करने की योजना रेन वाटर हार्वेस्टिंग कागज पर संचालित हो रही है। हालत यह है कि भूगर्भ जलस्तर तेजी से नीचे खिसकता जा रहा है। जहां लोगों को शुद्ध पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। अब सबमर्सिल नलकूप लगवाना पड़ रहा है। कागज पर पोखरियों में पानी भरना दिखाकर इतिश्री कर ली जाता है।
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जिले में 684 ग्राम पंचायतें हैं। भूगर्भ जल स्तर को बनाए रखने के लिए सभी गांवों में मनरेगा के तहत लाखों की लागत से आदर्श जलाशय तथा पोखरियों की खुदाई कराया गया है। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो गत वर्ष 2016 में 619 पोखरियां खुदवाई गई हैं। जबकि वर्ष 2017 में 150 पोखरियों खुदाई का लक्ष्य रखा गया है। वहीं आदर्श जलाशय योजना के तहत भी प्रत्येक गांवों में एक पोखरियों की खुदाई कराई जा चुकी है। भारी भरकम धनराशि खर्च होने के बाद भी सरकारी मंशा सफल होती नजर नहीं आ रही है। बरसात का पानी तथा लोगों के घरों का पानी पोखरियों में जाता ही नहीं है। इधर उधर बह जाता है। नियमों को ताक पर रखकर पोखरी खुदाई कर इतिश्री कर ली गई है।
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प्रतिवर्ष पोखरियों के मरम्मत के नाम पर हजारों रुपये खर्च कर हजम कर लिया जाता है। आम लोगों को पानी की उपलब्धता तथा जल संचयन की दृष्टि से प्रशासन की ओर से नहरों के समीप पोखरियों में पानी भरने का निर्देश भी दिया गया है। विभागीय लापरवाही की स्थिति है कि लंबे समय से अधिकांश पोखरियों तथा आदर्श जलाशयों में धूल उड़ रही है। बरसात के पानी को रिचार्ज करने की योजना रेन वाटर हार्वेस्टिंग कागज पर संचालित हो रही है। हालत यह है कि भूगर्भ जलस्तर तेजी से नीचे खिसकता जा रहा है। जहां लोगों को शुद्ध पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। अब सबमर्सिल नलकूप लगवाना पड़ रहा है। कागज पर पोखरियों में पानी भरना दिखाकर इतिश्री कर ली जाता है।
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