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न तो नहरों की सफाई हुई और न पानी आया

Sat, 09 Jun 2018 12:39 AM IST
mau
mau Updated Sat, 09 Jun 2018 12:39 AM IST
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Neither was the cleanliness of the canals nor did the water come
नहरों से उड़ रही धूल
 ख्ररीफ सीजन में धान की नर्सरी डालने का समय चल रहा है। लेकिन नहरों में साफ सफाई न होने और पानी न छोड़े जाने के चलते नहर से संबद्ध माइनरों में पानी न आने के चलते किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। माइनरें सूखी होने के कारण किसान न तो धान की नर्सरी डाल पा रहे हैं और न ही तैयार नर्सरी की रोपाई कर पा रहे हैं। जबकि सिंचाई विभाग के अधिकारी नहरों की साफ सफाई करने का दावा कर रहे है। 15 मई से 20 जून तक धान की नर्सरी डालने का उचित समय माना जाता है। नहरों में पानी नहीं रहने से किसान नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। बताते चले कि कृषि विभाग में दर्ज धान का रकबा 11 हजार 618 हेक्टेयर है।
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जिसमें 7167.32 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई नहरों पर निर्भर है। जिले में 211.222 किलोमीटर तक 31 नहरों का जाल है। नहरों में पानी नहीं रहने से इन किसानों को धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। सिल्ट की सफाई के कारण 26 अप्रैल से नहरों को बंद कर दिया गया है। दोहरीघाट क्षेत्र में नहर की शताखाओं में पानी नहीं आने से धान की नर्सरी का काम बाधित है। जिन किसानों के पास पम्पिंग सेट की सुविधा है वे नर्सरी डालने की तैयारी में जुट गए हैं। परंतु जो किसान नहर के पानी के भरोसे है।
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वे नहरों में पानी नहीं आने के कारण धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। जबकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि नहरों की साफ सफाई के लिए विभाग द्वारा युद्धस्तर पर कार्य कराया जा रहा है। इसके तहत विभाग की ओर करीब 60 लाख का इस्टीमेट बनाया गया है, इसमें अभी तक 137.2 किमी नहर की साफ सफाई की जा चुकी है। अागामी दस दिनों में शेष अधूरे नहरों की साफ सफाई का दावा किया जा रहा है।
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