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बच्चों की उपस्थिति नगण्य
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 05 Nov 2015 12:00 AM IST
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दर्जनों विद्यालयों में पंजीकृत छात्र-छात्राओं की उपस्थिति काफी कम है।
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विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि कई उच्च प्राथमिक विद्यालयों में
गणित, विज्ञान शिक्षकों का अभाव है।
जबकि दर्जनों विद्यालयों में गणित विज्ञान शिक्षकों की भरमार है। लेकिन पठन पाठन जैसे-तैसे चल रहा है। विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लेकिन कागज में सब कुछ ओके चल रहा है।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। शिक्षा सत्र का आठवां माह चल रहा है। लेकिन अधिकांश विद्यालयों में शैक्षिक माहौल बेहतर नहीं बन पाया है।
शासन की ओर से विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता की जांच के लिए अधिकारियों को प्रत्येक माह में 10-10 विद्यालयों का निरीक्षण करने का फरमान जारी किया गया है, लेकिन विभागीय रिपोर्ट में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है।
कागज में तो जिले के परिषदीय विद्यालयों में 164588 बच्चों का नामांकन किया गया है।
हालत यह है कि विद्यालयों में पंजीकृत छात्र छात्राओं के सापेक्ष उपस्थिति नाम मात्र ही मिल रही है। शिक्षक भी ड्यूटी बजाकर घर चले जा रहे हैं।
बीएसए के निरीक्षण में कई स्कूलों में नामांकित बच्चों के सापेक्ष उपस्थिति नाम मात्र मिली है। यही नहीं विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। घोसी ब्लाक के दर्जनों विद्यालयों के परिसर में लगे इंडिया मार्क टू हैंडपंप खराब पड़े हैं। यही नहीं कई उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित के शिक्षक ही नहीं हैं।
इससे बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। जबकि कई विद्यालयों में पांच-पांच गणित विज्ञान शिक्षकों की तैनाती की गई है। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार का कहना था कि खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
जबकि दर्जनों विद्यालयों में गणित विज्ञान शिक्षकों की भरमार है। लेकिन पठन पाठन जैसे-तैसे चल रहा है। विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लेकिन कागज में सब कुछ ओके चल रहा है।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। शिक्षा सत्र का आठवां माह चल रहा है। लेकिन अधिकांश विद्यालयों में शैक्षिक माहौल बेहतर नहीं बन पाया है।
शासन की ओर से विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता की जांच के लिए अधिकारियों को प्रत्येक माह में 10-10 विद्यालयों का निरीक्षण करने का फरमान जारी किया गया है, लेकिन विभागीय रिपोर्ट में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है।
कागज में तो जिले के परिषदीय विद्यालयों में 164588 बच्चों का नामांकन किया गया है।
हालत यह है कि विद्यालयों में पंजीकृत छात्र छात्राओं के सापेक्ष उपस्थिति नाम मात्र ही मिल रही है। शिक्षक भी ड्यूटी बजाकर घर चले जा रहे हैं।
बीएसए के निरीक्षण में कई स्कूलों में नामांकित बच्चों के सापेक्ष उपस्थिति नाम मात्र मिली है। यही नहीं विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। घोसी ब्लाक के दर्जनों विद्यालयों के परिसर में लगे इंडिया मार्क टू हैंडपंप खराब पड़े हैं। यही नहीं कई उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित के शिक्षक ही नहीं हैं।
इससे बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। जबकि कई विद्यालयों में पांच-पांच गणित विज्ञान शिक्षकों की तैनाती की गई है। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार का कहना था कि खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।