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Mau News: फरवरी में सर्दी कम होने पर बरती लापरवाही, ब्रेन अटैक के बढ़े मरीज

Tue, 11 Mar 2025 11:49 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Mar 2025 11:49 PM IST
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Negligence shown in February due to reduction in cold, number of brain attack patients increased
मऊ। शहर में हर बार की तुलना में इस बार फरवरी में सर्दी का असर कम रहा। इसके बाद इस माह में बीते दो साल के तुलना में बीपी, हार्ट के मरीजों के साथ ब्रेन अटैक के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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इसमें ब्रेन अटैक के चलते मरने वाले मरीजों की संख्या दो सालों के तुलना में ज्यादा है। इसमें बीते माह ही इस तरह की 13 मरीजों को जिला अस्पताल इमरजेंसी से रेफर किया गया।
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जबकि दो नगर के बड़े निजी अस्पताल में आंकड़ा तीस से ज्यादा मरीजों का रहा। जबकि बीते साल यह आंकड़ा 15 से कम था।
नगर के निजी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के आंकड़ों को माने तो बीते फरवरी में ब्रेन अटैक के एक निजी अस्पताल में 14 और अन्य अस्पतालों में 13 मरीज पहुंचे थे। इसमें तीन मरीजों की ब्रेन अटैक से मौत हो गई। 2023 फरवरी में कुल आंकड़ा दस से कम मरीजों का था।
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आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ डॉक्टर संजय सिंह और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गोपालकृष्ण राय का कहना है कि जिन मरीजों में ब्लडप्रेशर और डायबिटीज की शिकायत है कड़ाकेदार सर्दी में तो अपना पूरा ख्याल रखते हैं, लेकिन सर्दी कम होने पर लापरवाही बरतते हैं। ऐसे मरीज नियमित अपना चेकअप कराएं।
वहीं इन लोगों ने ब्रेन अटैक का प्रमुख कारण और इसके लक्षण के बारे में बताया कि जब नसों में खून की सप्लाई नहीं हो पाती है और दिमाग को जरूरत के हिसाब से रक्त नहीं मिलता है तब ब्रेन अटैक होता है।

सीएमओ डॉक्टर राहुल सिंह ने बताया कि आम बोलचाल की भाषा में ब्रेन हेमरेज और इस्किमिक अटैक को लोग ब्रेन अटैक बोलते हैं, लेकिन इसमें काफी फर्क है। इस्केमिक अटैक तब आता है जब दिमाग में खून पहुंचाने वाली नसों में ब्लॉकेज होता है। इसमें मृत्युदर कम होती है। वहीं ब्रेन हेमरेज में तब होता है जब दिमाग में पहुंचने वाली नसें फट जाती है। इसमें समय पर उपचार नहीं मिला तो मौत की संभावना ज्यादा होती है।
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