मऊ। महिला ऐच्छिक ब्यूरो की बैठक रविवार को सीओ घोसी श्वेता आशुतोष की देखरेख में पुलिस लाइन में हुई। इसमें 19 पारिवारिक मामले आए, जिसमें ब्यूरो के सदस्यों के प्रयास से 10 मामले निबटाए गए। तीन दंपती सारे मतभेद भुलाकर साथ रहने को राजी हुए। शेष मामलो में बैठक की अगली तिथि एक सितंबर नियत कर पक्षकारों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया। ब्यूरो के प्रयास से शबनम और इसरार,रंजू और मिथुन तथा कंचन और राजू आपसी मतभेद भुलाकर साथ रहने को तैयार हो गए। वही आरती और मुकेश के मामले में मुकेश ने आरती को 85 हजार रुपया भरण पोषण दिया तथा फरहाना और शमीम के मामले में शमीम ने फरहाना को एक लाख रुपया भरण पोषण के रुप में दिया। जिसके चलते उनके मामले का निबटारा हुआ। रामअशीष चौहान और प्रीति चौहान के मामले में वादी के अनुरोध पर तथा गुडिया और राजू का मामला कोर्ट में लंबित होने के चलते और गीता और नारद तथा पूनम और देवचंद के मामले में पक्षकारों के लगातार अनुपस्थिति के चलते और अश्मिता और निरंजन के मामले में पक्षकार दूसरे जनपद के होने के चलते पत्रावली निबटाई गई। इस दौरान तीन मामलों में पक्षकारों ने सुलह के लिए समय मांगा। पांच मामलों में एक-एक पक्ष तथा एक मामले में कोई पक्षकार उपस्थित नहीं हुआ। जिसके चलते उनके मामलों में एक सितंबर 2019 की तिथि नियत कर पक्षकारों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया गया। बैठक में सर्वेश दूबे,अर्चना उपाध्याय, मौलवी अरशद, डा. एमए खान, रत्नेश पांडेय, इशरावती यादव के साथ ही पक्षकार और उनके परिजन उपस्थित रहे।