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मऊः नए दावेदार गिना रहे तत्कालीन प्रधानों की कमियां
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इंदारा। ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण राजनीति की गतिविधियों में भी तेजी आ गई है। तत्कालीन प्रधानों की कमियां गिनाकर नए दावेदार ग्रामीणों को विकास के सपने दिखा रहे हैं।
ग्राम पंचायतों में चुनावों को लेकर ग्रामीण राजनीति में हलचल तो प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने से पहले से ही आरंभ हो गई थीं। प्रधानी के आगामी चुनाव को लेकर दावेदार भी निकल कर सामने आ गए हैं। वह तत्कालीन प्रधानों की एक-एक कमियां गिनाकर अपनी जीत की बुनियाद पक्की करने में दिन-रात जुटे हैं। गरीबों मजदूरों के बीच जाकर दावेदारों ने उठना-बैठना बढ़ा दिया है।
लोगों के प्रति हमदर्दी दिखाकर अपनी बात बेबाकी से रख भी रहे हैं। लोगों रुके पड़े कार्य करने के दावे भी कर रहे हैं। कई गांवों में निवर्तमान प्रधान भी चुनावी मैदान में कूदने के लिए फिर ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे लोग वह अपने कार्यकाल में कराए गए कार्यों का हवाला दे रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ जिनको दिलाया गया है, उनके जरिए दुबारा प्रधानी जीतने केआधार तैयार कर रहे हैं।
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दरअसल, ग्रामीणों के लिए जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य से ज्यादा प्रधानी का चुनाव अहमियत रखता है। इसके लिए चुनाव की तारीख तय होने से पहले ही भावी प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पाले में बनाए रखने के हर जतन करने शुरु कर दिए हैं। लोगों के छोटे बड़े रुके काम करवाने से लेकर बीमारों को अस्पताल पहुंचाने , उनके इलाज की व्यवस्था करने करने घायलों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर मृतकों के अंतिम संस्कार में भाग लेने से लेकर ऐसे लोग ों के लिए वाहन उपलब्ध कराने तक की कवायद भावी प्रत्याशी कर रहे हैं।
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ग्राम पंचायतों में चुनावों को लेकर ग्रामीण राजनीति में हलचल तो प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने से पहले से ही आरंभ हो गई थीं। प्रधानी के आगामी चुनाव को लेकर दावेदार भी निकल कर सामने आ गए हैं। वह तत्कालीन प्रधानों की एक-एक कमियां गिनाकर अपनी जीत की बुनियाद पक्की करने में दिन-रात जुटे हैं। गरीबों मजदूरों के बीच जाकर दावेदारों ने उठना-बैठना बढ़ा दिया है।
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लोगों के प्रति हमदर्दी दिखाकर अपनी बात बेबाकी से रख भी रहे हैं। लोगों रुके पड़े कार्य करने के दावे भी कर रहे हैं। कई गांवों में निवर्तमान प्रधान भी चुनावी मैदान में कूदने के लिए फिर ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे लोग वह अपने कार्यकाल में कराए गए कार्यों का हवाला दे रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ जिनको दिलाया गया है, उनके जरिए दुबारा प्रधानी जीतने केआधार तैयार कर रहे हैं।
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दरअसल, ग्रामीणों के लिए जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य से ज्यादा प्रधानी का चुनाव अहमियत रखता है। इसके लिए चुनाव की तारीख तय होने से पहले ही भावी प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पाले में बनाए रखने के हर जतन करने शुरु कर दिए हैं। लोगों के छोटे बड़े रुके काम करवाने से लेकर बीमारों को अस्पताल पहुंचाने , उनके इलाज की व्यवस्था करने करने घायलों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर मृतकों के अंतिम संस्कार में भाग लेने से लेकर ऐसे लोग ों के लिए वाहन उपलब्ध कराने तक की कवायद भावी प्रत्याशी कर रहे हैं।