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ईएमओ की कमी ने पकड़ा तूल, डाक्टरों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी
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मऊ। जिला अस्पताल की लापरवाही का खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ता है। आए दिन जिला अस्पताल से चिकित्सकों और कर्मचारियों के लापरवाही की खबरें आती रहती हैं। वहीं जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी के कारण अस्पताल की इमरजेंसी सेवा काफी प्रभावित है। इसी बीच विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी इमरजेंसी ड्यूटी करने को साफ मना कर दिया है।
अस्पताल में ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) का अभाव है। स्थिति यह है विशेषज्ञ चिकित्सकों को ईएमओ बनाकर जैसे-तैसे इमरजेंसी व्यवस्था संचालित की जा रही है। अस्पताल में पद के सापेक्ष चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित है। इसी बीच चिकित्सकों ने भी तेवर तल्ख कर लिये हैं। चिकित्सकों ने जिला अस्पताल प्रशासन को पत्र देकर इमरजेंसी ड्यूटी करने से मना कर दिया है। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल में इमरजेंसी में ड्यूटी के लिए ईएमओ की तैनाती की जाए।
चिकित्सकों ने चेताया है कि वह एक जनवरी से कार्य बहिष्कार करेंगे। जिला अस्पताल के महत्वपूर्ण पद भी रिक्त पड़े हैं, चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे ही दिख रही है। अस्पताल में इमरजेंसी में ड्यूटी के लिए तीन ईएमओ की जरूरत है। यह तीनों पद काफी समय से खाली है। हालांकि जिला अस्पताल में 26 चिकित्सकों का पद है। लेकिन वर्तमान में 16 चिकित्सकों की ही तैनाती है। जिला अस्पताल में हर रोज 11 सौ से अधिक की ओपीडी है। चिकित्सकों की कमी इलाज में बाधा बन रही है।
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इमरजेंसी में मरीज की मौत पर हुआ था हंगामा
मऊ। जिला अस्पताल 25 नवंबर को 45 वर्षीय मरीज की मौत पर जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। जिसकी जानकारी मिलने पर सपा के राष्ट्रीय सचिव व प्रवक्ता राजीव राय अस्पताल पहुंचे थे और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की जानकारी आलाधिकारियों को दी थी। राजीव राय ने आरोप लगाया था कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में चिकित्सक नहीं बैठ रहे हैं, मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस बृजकुमार ने बताया कि चिकित्सकों ने कार्य बहिष्कार के लिए पत्र सौंपा है। ईएमओ की कमी के कारण विशेषज्ञ चिकित्सकों से ही इमरजेंसी का भी काम लिया जाता है। चिकित्सकों के पत्र को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।
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अस्पताल में ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) का अभाव है। स्थिति यह है विशेषज्ञ चिकित्सकों को ईएमओ बनाकर जैसे-तैसे इमरजेंसी व्यवस्था संचालित की जा रही है। अस्पताल में पद के सापेक्ष चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित है। इसी बीच चिकित्सकों ने भी तेवर तल्ख कर लिये हैं। चिकित्सकों ने जिला अस्पताल प्रशासन को पत्र देकर इमरजेंसी ड्यूटी करने से मना कर दिया है। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल में इमरजेंसी में ड्यूटी के लिए ईएमओ की तैनाती की जाए।
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चिकित्सकों ने चेताया है कि वह एक जनवरी से कार्य बहिष्कार करेंगे। जिला अस्पताल के महत्वपूर्ण पद भी रिक्त पड़े हैं, चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे ही दिख रही है। अस्पताल में इमरजेंसी में ड्यूटी के लिए तीन ईएमओ की जरूरत है। यह तीनों पद काफी समय से खाली है। हालांकि जिला अस्पताल में 26 चिकित्सकों का पद है। लेकिन वर्तमान में 16 चिकित्सकों की ही तैनाती है। जिला अस्पताल में हर रोज 11 सौ से अधिक की ओपीडी है। चिकित्सकों की कमी इलाज में बाधा बन रही है।
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इमरजेंसी में मरीज की मौत पर हुआ था हंगामा
मऊ। जिला अस्पताल 25 नवंबर को 45 वर्षीय मरीज की मौत पर जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। जिसकी जानकारी मिलने पर सपा के राष्ट्रीय सचिव व प्रवक्ता राजीव राय अस्पताल पहुंचे थे और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की जानकारी आलाधिकारियों को दी थी। राजीव राय ने आरोप लगाया था कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में चिकित्सक नहीं बैठ रहे हैं, मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस बृजकुमार ने बताया कि चिकित्सकों ने कार्य बहिष्कार के लिए पत्र सौंपा है। ईएमओ की कमी के कारण विशेषज्ञ चिकित्सकों से ही इमरजेंसी का भी काम लिया जाता है। चिकित्सकों के पत्र को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।