रानीपुर। ब्लाक क्षेत्र में तीन दशक पूर्व बना खुरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद ढहने की कगार पर पहुंच गया है। जर्जरन और बदहाल हो चुकी इस पीएचसी में हल्की बारिश में भी पानी टपकने लगता है। ऐसे में चिकित्सक तो क्या मरीज भी यहां नहीं आना चाहते। मरम्मत के अभाव में यह पूरी तरह कंडम हो चुका है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को अन्य सरकारी अस्पतालों या फिर निजी क्लीनिक का सहारा लेना पड़ रहा है। हालात की जानकारी होने के बाद भी विभागीय अधिकारी इसकी मरम्मत के प्रति लापरवाह बने हैं। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ सुविधा मुहैया कराने के लिए 1985 में बना चार बेड वाला खुरहट प्राथमिक स्वास्थ केंद्र मरम्मत के अभाव में कंडम हो गया है। हालत यह है कि भवन अब ढहने की कगार पर पहुंच चुका है। जर्जर अस्पताल को देख चिकित्सक भी यहां बैठने से कतराते हैं। जबकि मरीज यहां दिखाकर जल्द निकल जाने में अपनी भलाई समझते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन अमारी, खुरहट, हाजीपुर, कसारी, धर्मसिपुर, एकडंगा, भौरेपुर, सोनिसा, रामपुर बखरिया, चक्रदेवा गांवों से 50 से ज्यादा मरीज उपचार कराने आते हैं। यह संख्या और बढ़ जाती अगर अस्पताल में व्यवस्थाएं बेहतर हो जातीं। अस्पताल में उपचार के लिए छह पद सृजित है। जिसमे प्रभारी चिकित्साधिकारी, चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्याय, एनएमए, एलए है। लेकिन मौजूदा समय में स्वास्थ केंद्र के प्रभारी ब्लाक क्षेत्र के ही काझा खुर्द स्वास्थ केंद्र से अटैच हैं। ऐसे में अस्पताल केवल चिकित्सक, वार्ड ब्वाय और एनएमए के भरोसे चल रहा है। ग्रामीण रिंकू श्रीवास्तव, अशोक, नर्मदा, फातिमा, गुलाबी, शंकर, बृजेश ने बताया किजर्जर भवन की मरम्मत तथा अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती की मांग को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है। लेकिन नतीजा सिफर रहा। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. कमलेश गुप्ता ने बताया कि विभागीय उच्चाधिकारियो को पत्र लिखा गया है।