संवाद न्यूज एजेंसीमऊ। कलेक्ट्रेट सभागार में अस्थाई गो आश्रय स्थलों की स्थापना, संचालन, प्रबंधन की अनुसरण एवं मूल्यांकन को लेकर समीक्षा समिति की बैठक जिलाधिकारी अरुण कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद में वर्तमान में कुल 26 गो आश्रय स्थल हैं। जिनमें दो स्थाई एवं 24 अस्थाई हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा योजना के अंतर्गत प्रत्येक विकास खंडों में तीन-तीन नए अस्थाई गौशाला केंद्र बनाए जाने हैं। इसको लेकर जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारी एवं खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों में मिलकर एक सप्ताह के अंदर भूमि का चिंहीकरण कर लें। चिंहीकरण के दौरान इस बात का अवश्य ध्यान रखें की चिंहित भूमि विवादित न हो, वहां पहुंचने के लिए रास्ता हो, भूमि समतल हो इसके अलावा ऐसी ग्राम पंचायत हो जो बड़ी हो। जिलाधिकारी ने गौशालाओं पर टूटे बाउंड्री वाल एवं आश्रय स्थलों पर टूटे फूटे फर्श आदि का मरम्मत कार्य ग्राम निधि से कराये जाने का निर्देश दिया। जनपद में कुल चार कान्हा गोशाला क्रमश: दोहरीघाट, अमिला, मधुबन एवं चिरैयाकोट में बनाए जाने हैं, जिसको लेकर जिलाधिकारी ने सभी संबंधित उप जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि यथाशीघ्र भूमि का चिन्हांकन कर संबंधित अधिशासी अधिकारियों को उपलब्ध करा दें।जनपद में एनजीओ द्वारा संचालित दो गौशाला केंद्रों को क्रमश: कुड़वा विकासखंड रतनपुरा एवं बगली पिजड़ा विकासखंड परदहां में दुर्व्यवस्था के चलते जिलाधिकारी ने संबंधित एनजीओ के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि सभी गौशालाओं पर निरीक्षण एवं स्टॉक रजिस्टर अवश्य रखें। समस्त नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने संबंधित गौशाला केंद्रों पर लगातार भ्रमण कर वहां की व्यवस्था से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राम सिंह वर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एम प्रसाद, समस्त उपजिलाधिकारी, समस्त खंड विकास अधिकारी, समस्त अधिशासी अधिकारी एवं समस्त नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।