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दो दशकों से बंद शीतगृहों को लेकर रही उदासीनता

Sun, 06 Feb 2022 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 11:24 PM IST
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Indifference towards cold storages closed for two decades
कोपागंज के टडियांव में बंद शीतगृह।संवाद - फोटो : MAU
मऊ/कोपागंज। घोसी विधानसभा क्षेत्र में दशकों से बंद पड़े शीतगृह कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बन सके। इस विधान सभा के जनप्रतिनिधि हमेशा ही सत्ता से जुड़े रहे। यहां से पांच बार चुनाव जीतने वाले फागू चौहान तो कैबिनेट मंत्री भी रहे। सुधाकर सिंह और विजय राजभर भी अपने अपने कार्यकाल में सत्ता पक्ष के विधायक रहे। लेकिन इन दोनों शीतगृहों को चालू कराने की प्रतिबद्धता किसी ने नहीं जताई। यही वजह रही कि कभी जनपद ही नहीं आस पास के जिले के आलू उत्पादक किसानों के लिए संजीवनी रहे ये दोनों शीतगृह लंबे समय से बंद पड़े हैं। अब तक इनके उपकरण भी जंग लगकर बेकार हो चुके हैं। जनपद में सहकारी क्षेत्र के तीन कोल्ड स्टोरेज हैं पर तीनों 20 वर्षो से भी अधिक समय से बंद हैं। इनमें से चार हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले टड़ियांव और समेरीजमालपुर में स्थित शीतगृह घोसी विधान सभा क्षेत्र में आते हैं जबकि दोहरीघाट स्थित शीतगृह मधुबन विधान सभा क्षेत्र में आता है। इन बंद पड़े सहकारी शीत गृहों को चालू कराने के किसी भी जनप्रतिनिधि ने अब तक कोई पहल नहीं की। इससे क्षेत्र के किसानों को आलू भण्डारण के लिए गाजीपुर और आजमगढ़ में प्राइवेट शीतगृहों का सहारा लेना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि जो राजनेता इन बंद पड़े सहकारी क्षेत्र के शीतगृहों को चालू कराने की प्रतिबद्धता जताएगा, उसे ही वोट दिया जाएगा। जनपद के कद्दावर नेता कल्पनाथ राय ने घोसी विधानसभा क्षेत्र में टड़ियांव में और सेमरी जमालपुर में चार हजार मीट्रिक टन क्षमता के शीतगृहों का निर्माण कराया था। इनमें प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलता था। आलू उत्पादकों को नजदीक ही आलू भंडारण की सुविधा मिलती थी। कोल्ड स्टोर खुल जाने से आलू की खेती का क्षेत्रफल भी बढ़ा। लेकिन सरकारों की उपेक्षा के चलते धीरे धीरे शीतगृहों की हालत बिगड़ती गई और 1997 में सेमरी जमालपुर का शीतगृह बंद हो गया जबकि साल 2000 में टड़ियांव स्थित कोल्ड स्टोर में ताले लग गए। ऐसे में आलू की खेती का रकबा घटता गया। लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इन्हें चालू कराने के प्रति दिलचस्पी नहीं ली और न ही ये कभी चनावी मुद्दा बन सका। क्षेत्र के किसान एवं लोकदल के प्रदेश सचिव देवप्रकाश राय कहते हैं कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कभी भी इन बंद पड़े शीतगृहों को पुनरुद्धार का प्रयास नहीं किया। किसान नेता रामनवल राही कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों की ओर से इन बंद शीतगृहों को चालू कराने का कभी भी प्रयास नहीं किया गया। मंगरू मौर्य कहते हैं कि शीतगृहों के चालू रहने पर आलू भंडारण के लिए अन्यत्र नहीं जाना पड़ता था। भेलाबांध निवासी मुद्रिका यादव कहते हैं कि घोसी विधान सभा से चुनाव जीतने वाले विधायकों ने कभी इन शीतगृहों को चालू कराने की सुधि नहीं ली।
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