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Mau News: शिक्षकों ने मांगा साल में 15 दिन का विशेष अवकाश
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मधुबन में अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते टीचर सेल्फ केयर टीम जिला इकाई के पदाधिकारी। स्रोत
मधुबन। टीचर सेल्फ केयर टीम (टीएससीटी) की जिला इकाई ने साल में 15 दिन का विशेष अवकाश देने की मांग उठाई है। रविवार को संगठन के पदाधिकारियों ने मधुबन विधायक राम बिलास चौहान की अनुपस्थिति में भाजपा नेता शिवानंद मल्ल को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए लागू कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए आभार जताया। साथ ही मांग की कि इस सुविधा को सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रखा जाए।
इस दौरान जिला प्रवक्ता तारकेश्वर पांडेय, जिला कोषाध्यक्ष संतोष कुमार, जिला सहसंयोजक राम बिलास चौहान (एआरपी), संतोष कुमार मौर्य, अरुण कुमार हिंद, अजीत कुमार यादव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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14 आकस्मिक अवकाश पर्याप्त नहीं : पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों को पूरे वर्ष में मिलने वाले 14 आकस्मिक अवकाश वर्तमान सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्याप्त नहीं हैं। परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु, माता-पिता के अस्वस्थ होने, संतान के जन्म सहित कई ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब शिक्षक को पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निभाने के लिए अवकाश की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा अवकाश व्यवस्था में ऐसी परिस्थितियों के लिए विशेष अवकाश का प्रावधान नहीं होने से शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए वर्ष में 15 दिन का विशेष अवकाश दिए जाने की जरूरत है।
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पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए लागू कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए आभार जताया। साथ ही मांग की कि इस सुविधा को सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रखा जाए।
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इस दौरान जिला प्रवक्ता तारकेश्वर पांडेय, जिला कोषाध्यक्ष संतोष कुमार, जिला सहसंयोजक राम बिलास चौहान (एआरपी), संतोष कुमार मौर्य, अरुण कुमार हिंद, अजीत कुमार यादव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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14 आकस्मिक अवकाश पर्याप्त नहीं : पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों को पूरे वर्ष में मिलने वाले 14 आकस्मिक अवकाश वर्तमान सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्याप्त नहीं हैं। परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु, माता-पिता के अस्वस्थ होने, संतान के जन्म सहित कई ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब शिक्षक को पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निभाने के लिए अवकाश की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा अवकाश व्यवस्था में ऐसी परिस्थितियों के लिए विशेष अवकाश का प्रावधान नहीं होने से शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए वर्ष में 15 दिन का विशेष अवकाश दिए जाने की जरूरत है।