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Mau News: जिन प्रधानों की शिक्षा कम वहां विकास कम, स्नातक-परास्नातक प्रधानों ने ग्राम पंचायतों को बनाया मॉडल

Sun, 18 Jan 2026 12:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 12:00 AM IST
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In villages where the village heads have less education, development is slower, while village heads with graduate and postgraduate degrees have transformed their village councils into model examples.
जनपद में 645 ग्राम पंचायतें हैं, इनमें 168 प्रधान पांचवीं पास और 19 निरक्षर हैं। इनमें महिला प्रधानों की संख्या अधिक है। जिन प्रधानों की शिक्षा कमजोर है उनके कार्यकाल में विकास की गति धीमी रही है। बेहतर विकास कार्य कराने वाली जनपद की 26 ग्राम पंचायतों को मॉडल घोषित किया गया है।
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मॉडल गांव रसूलपुर आदमपुर, दुबारी, सरवां, मीरपुर रहीमाबाद, रसूलपुर, गोंठा के प्रधान के पास स्नातक की डिग्री है। कोईरियापार और धर्मपुर विशुनपुर के प्रधान के पास परास्नातक की डिग्री है।
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पीवाताल, इंदारा, मालव, मर्यादपुर के प्रधान 10वीं पास हैं। रामपुर चकजगन्नाथ, पकड़ी बुजुर्ग, लखनी मुबारकपुर, काझा के प्रधान इंटरमीडिएट पास हैं। नदवासराय, अलीनगर, कसारा, शहरोज, बेलौझा, भुसुवा, रैकवारेडीह के प्रधान पांचवीं पास हैं।
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इनमें पांचवी पास सात प्रधान अपवाद रहे, जिन्होंने अपनी ग्राम पंचायत को मॉडल बनाने अहम भूमिका निभाई। गांव में कचरा प्रबंधन के लिए आरआरसी, हर घर शौचालय, चमकती सड़कें, हाईटेक पंचायत भवन बनवाए।
रतनपुरा ब्लॉक के नसीराबाद कला की प्रधान डॉ. प्रभा और रानीपुर ब्लॉक तेंदुवार उर्फ कटघर संजर ग्राम पंचायत के प्रधान डॉ. ओमप्रकाश यादव पीएचडी होल्डर हैं। 168 प्रधान पांचवी पास हैं, इनमें 96 महिलाएं हैं। 19 प्रधान निरक्षर हैं, इनमें भी महिलाओं की संख्या 14 है।
30 प्रधान आठवीं पास हैं इनमें 12 महिलाएं हैं। 106 प्रधान 10वीं पास हैं, इनमें 60 पुरुष हैं। 117 प्रधानों के पास स्नातक की डिग्री है, इनमें महिलाओं की संख्या 37 है। परास्नातक डिग्री वाले 36 प्रधान हैं, इनमें 9 महिला प्रधान हैं।
इंटरमीडिएट पास 124 प्रधान हैं, इनमें पुरुषों की संख्या 72 है। बचे प्रधानों के पास डिप्लोमा की डिग्री और अन्य डिग्री प्राप्त है, जिसकी उत्तर प्रदेश इलेक्शन कमीशन की साइट पर जानकारी साझा नहीं की गई है। संवाद

नौ में से एक ब्लॉक प्रमुख पीएचडी होल्डर
घोसी के ब्लॉक प्रमुख पीएचडी होल्डर हैं। कोपागंज ब्लॉक प्रमुख के पास स्नातक, दोहरीघाट के पारास्नातक, परदहां के इंटरमीडिएट, फतहपुर मंडाव ब्लॉक प्रमुख आठवीं पास हैं। मुहम्मदाबाद गोहना और रतनपुरा ब्लॉक प्रमुख के पास स्नातक और रानीपुर ब्लॉक प्रमुख के पास पारास्नातक की डिग्री है। बड़रांव ब्लॉक प्रमुख की शैक्षणिक जानकारी विभाग की साइट पर साझा नहीं की गई है। जनपद में जिला पंचायत सदस्य की 34 सीटें हैं, जो राजनीति के नजरिये से महत्वपूर्ण पद माना जाता है। 34 में से आठ जिला पंचायत सदस्यों के पास पारास्नातक की डिग्री है। तीन निरक्षर और दो पांचवीं पास हैं। आठ स्नातक पास, तीन 10वीं और नौ सदस्य इंटरमीडिएट पास हैं। निरक्षर सदस्यों में तीनों महिलाएं हैं।

कम पढ़े लिखे जनप्रतिनिधियों के साथ काम करने में होती है परेशानी
जनप्रतिनिधियों की शिक्षा को लेकर चर्चा करने पर उच्चाधिकारियों ने बताया कि कम पढ़े लिखे और बिना पढ़े लिखे प्रधानों के साथ काम करने में कुछ हद तक परेशानी होती है। नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि ग्राम पंचायत में किसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और विभागीय बैठकों में विकास के मुद्दों पर चर्चा के दौरान कई समस्याएं आती हैं। ऐसी ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास अधिकारी को ही अधिक काम करना पड़ता है।

पेंट लघु निर्माण उद्योग से ही है 50 लाख की आमदनी



दोहराघाट ब्लाक के मॉडल पंचायत गोठ में बने गोबर पेंट निर्माण लघु उद्योग से पेंट बिक्री से लागत के बाद 50 लाख रुपए की आमदनी हुई है। ये जानकारी स्नातक पास प्रधान रामजनम गुप्ता ने दी। बताया कि इस पेंट यूनिट के माध्यम से ग्राम पंचायत के विभिन्न समूहों की महिलाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है। ये जिले का पहला स्वदेशी पेंट उद्योग है। इसके अलावा इसी पंचायत में जिले का पहला स्पोर्ट्स स्टेडियम बना है।
आरआरसी, फिल्टर चेंबर वाली नालियां बनी हैं। यहां जिले का सबसे बेहतर अमृत सरोवर बना है। इन्हें गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। मॉडल गांव दुबारी में पहला अंतरिक्ष कक्ष बना है, जिसे कल्पना चावला का नाम दिया गया है। स्नातक पास प्रधान सपन कन्नौजिया ने बाढ़ग्रस्त गांव में बेहतर कार्य कर मॉडल बनाया है।
इंटर पास लखनौर के प्रधान आनंद मल ने शवदाह गृह, सुंदर अमृत सरोवर, इंटरलॉकिंग और फिल्टर चेंबर वाली नालियां बनवाई और जलनिकास को बेहतर किया। इन्हें भी गणतंत्र दिवस पर अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। नसीराबाद कला की प्रधान डॉ प्रभा ने गांव की बदहाल सड़कों को बेहतर बनाया है। जबकि कटघर संजर के प्रधान डॉ ओमप्रकाश यादव ने अपनी सूझ बूझ से दो दशक पुराने रास्तों के विवाद को सुलझाते हुए खड़ंजा और इंटरलॉकिंग का निर्माण कराया है।

कोई भी चुनाव लड़ने के लिए शिक्षा का स्तर निर्धारित नहीं है। अपने क्षेत्र में अधिक लोकप्रिय और व्यवहार कुशल व्यक्ति चुनवा में खड़ा होता है और लोग उन्हें ही अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं। कुछ कम पढ़े लिखे प्रधानों ने भी अपनी पंचायतों में बेहतर विकास कार्य कराए हैं और मिशाल कायम की है। -कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ, मऊ
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