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बिंदटोलिया गांव में कटान जारी रहने से दहशत में हैं कटान पीड़ित
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मऊ जिले के मधुबन तहसील के बिंटोलिया गाँव में घाघरा नदी द्वा होती कटान। अमर उजाला
- फोटो : MAU
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दुबारी (मऊ)। मधुबन के देवारा में घाघरा के कटान का दायरा बढ़ने से देवारा क्षेत्र के लोगों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई है। बिंदटोलिया गांव में कटान जारी रहने से गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए जीईओ ट्यूब लगाया गया है। कटान कम तो हुई है, लेकिन तटवर्ती इलाके के लोग दहशत में जी रहे हैं। मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा में घाघरा के कटान का दायरा बढ़ने से लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। पहले खैरा पुरवे में कटान हो रही थी। अब बिंदटोलिया में कटान तेज हो होती जा रही है। प्रतिदिन कटान हो रही है।
कटान पीड़ितों के अनुसार सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने में कारगर उपाय नहीं किया जा रहा है। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए जीईओ ट्यूब कटानस्थल पर रखा जा रहा है। कटान से 50 से अधिक लोगों का कच्चा मकान सहित विद्यालय का भवन, दो मंदिर नदी में विलीन हो चुका। दोनों गांवों में अब तक 500 बीघा जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। कटानपीड़ितों को भूमिहीन होने की चिंता सताने लगी है। कटानपीड़ितों का कहना है कि कटान की रफ्तार यही रही तो खैरा तथा बिंदटोलिया नदी मेें विलीन हो सकता है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभिंयता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि बिंदटोलिया नदी के किनारे बसा है। कटान रोकने के लिए काफी प्रयास किया गया। लेकिन अब जीईओ ट्यूब लगाया गया है। कटान काफी रुक गई है।
नदी के घटाव के बाद भी खतरा बरकरार
दोहरीघाट। घाघरा के जलस्तर में घटाव का क्रम जारी रहने के बाद भी नदी के कहर बरपाने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 10 सेमी घटाव दर्ज किया गया। नदी से उठ रही लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों से टकरा रही हैं। इससे ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरा में पड़ गया है।
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घाघरा के जलस्तर में घटाव होने से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे है लेकिन खतरा अभी ज्यो का त्यों बना हुआ है।ननदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को नदी का जलस्तर 69.15मीटर रहा। शुक्रवार को 69.25 मीटर रहा।नदी के तेज लहरे भारतमाता मंदिर से टकरा रही हैँ। इससे मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, राम जानकी मंदिर,लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर,शाही मस्जिद आदि पर खतरा अभी भी मंडरा रहा है।
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कटान पीड़ितों के अनुसार सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने में कारगर उपाय नहीं किया जा रहा है। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए जीईओ ट्यूब कटानस्थल पर रखा जा रहा है। कटान से 50 से अधिक लोगों का कच्चा मकान सहित विद्यालय का भवन, दो मंदिर नदी में विलीन हो चुका। दोनों गांवों में अब तक 500 बीघा जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। कटानपीड़ितों को भूमिहीन होने की चिंता सताने लगी है। कटानपीड़ितों का कहना है कि कटान की रफ्तार यही रही तो खैरा तथा बिंदटोलिया नदी मेें विलीन हो सकता है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभिंयता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि बिंदटोलिया नदी के किनारे बसा है। कटान रोकने के लिए काफी प्रयास किया गया। लेकिन अब जीईओ ट्यूब लगाया गया है। कटान काफी रुक गई है।
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नदी के घटाव के बाद भी खतरा बरकरार
दोहरीघाट। घाघरा के जलस्तर में घटाव का क्रम जारी रहने के बाद भी नदी के कहर बरपाने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 10 सेमी घटाव दर्ज किया गया। नदी से उठ रही लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों से टकरा रही हैं। इससे ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरा में पड़ गया है।
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घाघरा के जलस्तर में घटाव होने से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे है लेकिन खतरा अभी ज्यो का त्यों बना हुआ है।ननदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को नदी का जलस्तर 69.15मीटर रहा। शुक्रवार को 69.25 मीटर रहा।नदी के तेज लहरे भारतमाता मंदिर से टकरा रही हैँ। इससे मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, राम जानकी मंदिर,लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर,शाही मस्जिद आदि पर खतरा अभी भी मंडरा रहा है।