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अब पहले जैसा नहीं रहा होली का उत्साह और उमंग

Sun, 21 Mar 2021 11:25 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 11:25 PM IST
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Holi's excitement and excitement is not the same as before
मऊ। पहले होली के एक माह पहले से ही गांव-गांव में फाग गीत शुरू हो जाते थे। इससे आपसी सौहार्द बनता था और लोग एक-दूसरे से जुड़ते थे लेकिन अब इसके लिए किसी के पास वक्त ही नहीं है। अब पहले की जैसा होली का उत्साह और उमंग नहीं नजर आ रहा है। इस पर बुजुर्गों ने चिंता जताई है।
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रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के अमारी निवासी 66 वर्षीय कन्ता चौहान कहते हैं कि हम लोगों के युवावस्था में होली का स्वरूप कुछ और था उस समय गांव के युवक किसी के ऊपर गोबर रंग या मिट्टी फेंक देते थे तो कोई बुरा नहीं मानता था। होली के दिन पुरुष और महिलाएं एक दूसरे के के घर मिलने जाते थे, रंग खेलते और अबीर लगाकर गले मिलते थे। हम गांव में होली के गीत लोगों के दरवाजे दरवाजे पर गाया जाता था लेकिन आज के समय गांव में यह देखने को नहीं मिलता है लेकिन इस वर्तमान समय अगर किसी के ऊपर होली के दिन भी रंग पड़ जा रहा है तो लोग आग बबूला हो जाते हैं और मामला ज्यादा बिगड़ जाता है इस समय के होली से ज्यादा अच्छा होली हम लोगों के समय में था तब के होली में और आज के होली में बहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
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महासो निवासी जितेंद्र यादव कहते हैं पहले की होली और अबकी होली में काफी बदलाव हो गय है। पहले लोगों में सहनशीलता थी। लोगों में प्रेम और भाई चारे का भाव था। बसंत पंचमी की शाम से ही होली गीत शुरु हो जाते थे। गांव के किसी मंदिर अथवा सार्वजनिक अथवा किसी के मानिंद व्यक्ति के घर बैठकर वसंत ऋतु के आगमन से लेकर होली तक के गीत गाए जाते थे।
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खुरहट निवासी शिवपूजन यादव कहते हैं कि वे भी दिन क्या मस्ती भरे होते थे। शुद्ध मनारेजन, फूहड़ता का नामो निशान नहीं देवर भाभी से जुडे गीत भी होते थे लेकिन लोक मर्यादा के अंदर ही होते थे। अश्लीलता से काफी दूर ये होली गीत होते थे।

खुरहट निवासी कवलपति यादव भी अपनी युवावस्था में होली गीत गाते थे। कहते हैं कि गीतों में फूहड़ता नहीं अपितु स्वस्थ मनोरंजन होता था। लोकमर्यादाओं का ख्याल रखा जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। युवाओं की सोच बदल गई है ,परिस्थितियां बदल गई हैं।त्योहार मनाने के तौर तरीके बदल गए हैं।
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