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प्रशासन ने उपलब्ध करा दी होती नाव तो बच सकता था हादसा

Wed, 05 Aug 2020 10:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2020 10:18 PM IST
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Had the administration provided the boat, it could have saved the accident
मधुबन। जिला प्रशासन ने अगर समय रहते बाढ़ प्रभावित इलाके चक्की मूसाडोही गांव में ग्रामीणों की बात मानते हुए समय रहते उन्हें नावें उपलब्घ करा दी होती तो यह हादसा न होता। प्रशासन की इस लापरवाही पर ग्रामीणों में खासी नाराजगी है। उनका कहना था कि वह बार-बार अधिकारियों से नाव की गुहार लगाते रहे लेकिन वह उनकी आवाज की अनसुनी करते रहे। नतीजा पांच लोगों की मौत के रूप में सामने आ गया।
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घाघरा में काफी बाढ आ जाने के बाद चक्की मूसाडो ही गांव के लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नाव की कमी शिकायत बार-बार कर रहे थे। लेकिन गांव के लोगों की शिकायत थी कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे थे। गांव के राम नवल ने बताया कि काफी दिनों से चंकी मिश्रा डोही गांव घाघरा नदी के पानी से गिर गया था। लोगों को कहीं भी आने-जाने के लिए नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। गांव के लोग जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी से बार-बार पर्याप्त संख्या में नावों को उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी गांव वासियों की मांगों को नजरअंदाज कर दे रहे थे। राम शरीख का कहना था कि यदि प्रशासन ने पहले ही नावों की व्यवस्था कर दिया होता और बाढ़ से घिरे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के अपने दायित्व का निर्वहन किया होता तो पंाच लोगों को अपनी जान से हाथ न धोना पड़ता। ग्रामीणों का कहना था कि कुछ दिन पहले गांव में आए एसडीएम नेे नाव की मांग पर उन्हें आश्वासन भी दिया था। लेकिन वह हकीकत में नहीं बदला।
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जान बचाने का माध्यम बना सिलेंडर
मधुबन। घाघरा की बाढ़ से गांव घर जाने के डर से जान बचाकर नदी से पलायन कर रहे लोगों की जाने से नदी में बढ़ रहे लोगों की जान बचाने का माध्यम एक खाली रसोई गैस का सिलेंडर बना। नदी की तेज धारा में बह रहे लोगों की जान बचाने के लिए चक्की मूसाडोही गांव के ही गोविंद नामक युवक के दिमाग में एक बात सूझी। गोविंद नाव पर लगे लदे खाली सिलेंडर को पकड़ लिया और उसी के सहारे नदी में तैरने लगा। उसकी 2 साल की बेटी भी नाव पलटने से डूब रही थी। गोविंद ने अपनी बेटी को भी संभाला, इस बीच आसपास के डूब रहे लोग लोगों को सिलिंडर पकड़ने के लिए प्रेरित किया। इस तरह उसने पांच लोगों की जान बचाई । कुछ दूर तक सेंडर के सहारे नदी में तैर कर लोग अपनी जान बचाने में सफल रहे। सिलेंडर के सहारे चंद्रभान, किरण पुत्री राजेश और अरविंद की औरत की जान बच सकी। हालांकि किरण और राजेश अरविंद की औरत की हालत गंभीर बनी हुई है।
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तीन बच्चे हुए अनाथ
नाव दुर्घटना में जान गंवाने वाली सविता के पति सीताराम की मौत 10 दिन पूर्व हार्ट अटैक से हो गई थी। सीताराम की बेटी माधुरी की शादी तय थी। पति के निधन के बाद सविता इस बात को लेकर चिंतित थी कि बेटी की शादी वह कैसे करेगी। लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था। बाढ़ से परिवार को बचाने के लिए नाव ही उसके लिए अशुभ साबित हुई। हादसे में सविता की भी मौत हो गई। अब तक उसके बच्चे पिता की मौत के गम को भूल ही नहीं पाए थे कि इस हादसे मेें मां भी उसे छोड़कर चली गई ।10 दिन के अंदर माता और पिता दोनों को खो देने के बाद उनके बच्चे माधुरी, रवि और गोविंद बिलखते रहे।

मां और तीन बेटों को खोकर अरविंद हुआ बदहवास
मधुबन। नाव हादसे में अपने तीन नौनिहालों और वृद्धा मां को खो देने के बाद अरविंद मानो बदहवास हो गया। वह बार-बार कह उठता कि अब उसके आंगन में कभी भी बच्चों की किलकारी नहीं गूंजेगी। अरविंद बार-बार अपने बच्चों का नाम ले लेकर रो रहा था उसका छोटा भाई गोविंद उसे संभालने की कोशिश कर रहा था अरविंद की औरत भी नाव हादसे में डूब कर गंभीर हालत में पहुंच गई है।
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