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घाघरा नदी ने किया लाल निशान पार, दहशत
mau
Updated Thu, 09 Aug 2018 10:34 PM IST
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दोहरीघाट के तटवर्ती इलाके नवली उफनाई घाघरा से हो रही कटान।े
- फोटो : mau
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घाघरा नदी ने गुरुवार को खतरे का निशान पार लिया। ऐसे में नगर सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों की नींद उड़ गई है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी खतरा बिंदु से 10 सेमी ऊपर बहने से तटवर्ती इलाकों की सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलमग्मन हो गई है। नौली गांव में कटान से एक किसान की दो बिस्वा उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो गई। धनौली लोहरा बांध, नवली बांध तथा बीबीपुर बेलौली बंधे पर घाघरा की लहर टकराने से कस्बा की ऐतिहासिक धरोहरों तथा तटवर्ती़ इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
घाघरा में बाढ़ आने से तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी का जलस्तर 70 मीटर रहा।जबकि बुधवार को जलस्तर 69.85 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे में घाघरा का जलस्तर मेें 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। घाघरा के खतरा बिंदु पार करते ही नगर में हाहाकार मच गया है। नदी की प्रलयंकारी लहरे सीधे मुक्तिधाम स्थित भारत माता मंदिर, शवदाह घाट पर टक्कर मार रही है।इससे ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
कटान पीड़ितों का कहना है कि यदि भारत माता मंदिर, शवदाह घाट कटा तो मुक्तिधाम सहित सभी ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
इसके बावजूद सिचाई विभाग की तरफ से ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया जा सका है। घाघरा के खतरा बिंदु पार करने से तटवर्ती इलाको के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है।
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नौली गांव मेें कटान शुरू हो गई है। लाला निषाद की दो बिस्वा जमीन नदी में विलीन हो गई। धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, सरया, ठाकुरगाव, बीबीपुर, गोधनी, जमीराचौराडीह, पाऊस, बेलौली, ठिकरहीया, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर सहित गांवों की हजारों एकड़ फसल डूब गई है, जिससे पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि ऐसे में कई दिनों तक वह अपने जानवरों को क्या खिलाएंगे। इसकी चिंता उन्हें सता रही है।
धनौली लोहरा बांध, नवली बांध,तथा बीबीपुर बेलौली बंधे पर घाघरा की लहर टकरा रही है। ऐसे में बंधों पर दबाव पड़ रहा है। इसे लेकर इलाकाई लोगों में दहशत है। उनका कहना है कि बाढ़ की विभीषिका जानते हुए भी प्रशासन ने अभी तक कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए हैं। ऐसे में ग्रामीण पुरानी बाढ़ की विभीषिका याद कर सहम जा रहे। उनका कहना है कि अब नदी इस इलाके में जो कहर बरपाती है उसका जिक्र नहीं किया जा सकता है।
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घाघरा में बाढ़ आने से तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी का जलस्तर 70 मीटर रहा।जबकि बुधवार को जलस्तर 69.85 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे में घाघरा का जलस्तर मेें 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। घाघरा के खतरा बिंदु पार करते ही नगर में हाहाकार मच गया है। नदी की प्रलयंकारी लहरे सीधे मुक्तिधाम स्थित भारत माता मंदिर, शवदाह घाट पर टक्कर मार रही है।इससे ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
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कटान पीड़ितों का कहना है कि यदि भारत माता मंदिर, शवदाह घाट कटा तो मुक्तिधाम सहित सभी ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
इसके बावजूद सिचाई विभाग की तरफ से ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया जा सका है। घाघरा के खतरा बिंदु पार करने से तटवर्ती इलाको के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है।
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नौली गांव मेें कटान शुरू हो गई है। लाला निषाद की दो बिस्वा जमीन नदी में विलीन हो गई। धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, सरया, ठाकुरगाव, बीबीपुर, गोधनी, जमीराचौराडीह, पाऊस, बेलौली, ठिकरहीया, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर सहित गांवों की हजारों एकड़ फसल डूब गई है, जिससे पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि ऐसे में कई दिनों तक वह अपने जानवरों को क्या खिलाएंगे। इसकी चिंता उन्हें सता रही है।
धनौली लोहरा बांध, नवली बांध,तथा बीबीपुर बेलौली बंधे पर घाघरा की लहर टकरा रही है। ऐसे में बंधों पर दबाव पड़ रहा है। इसे लेकर इलाकाई लोगों में दहशत है। उनका कहना है कि बाढ़ की विभीषिका जानते हुए भी प्रशासन ने अभी तक कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए हैं। ऐसे में ग्रामीण पुरानी बाढ़ की विभीषिका याद कर सहम जा रहे। उनका कहना है कि अब नदी इस इलाके में जो कहर बरपाती है उसका जिक्र नहीं किया जा सकता है।