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डीएपी की कीमतों में भारी वृद्धि से उड़े किसानों के होश
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मऊ। कोरोना से जूझ रहे जिले के किसानों की अब एक और परेशानी बढ़ गई है। खेती के लिए अति महत्वपूर्ण रासायनिक खाद डाई अमोनियम फास्फेट काफी महंगी हो गई है। सहकारी क्षेत्र के इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर को ओपरेटिव ने 50 किग्रा बोरी वाले डीएपी खाद की कीमत में 58.33 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है। मार्च महीने तक जो डीएपी खाद की बोरी 1,200 रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब 1,900 रुपये कर दी गई है। खेती की लागत बढ़ने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है।
जिले में काफी संख्या में किसान इफको की डीएपी प्रयोग करते हैं। कृषि विभाग ने उर्वरक विक्रेताओं को डीएपी के पुराना स्टाक को बोरी पर प्रिंट रेट पर ही बेचने का फरमान जारी किया है।
सहकारी क्षेत्र के इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर को ओपरेटिव की तरफ से 50 किग्रा बोरी के डीएपी की कीमतों में एकाएक 700 रुपये बढ़ा दिए से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है। किसानों की मानें तो फसलों के मूल्य का समर्थन मूल्य 58 प्रतिशत तो नहीं बढ़ता है, लेकिन डीएपी की कीमतों में 50 किग्रा वाले डीएपी बोरी का दाम 700 रुपये बढ़ा दिया गया है। अब तो खेती की लागत बढ़ जाने से लागत भी निकलना मुश्किल होगा। किसानों की मानें तो इफको तो सहकारी क्षेत्र की कंपनी है, जिस पर काफी हद तक सरकार की मर्जी चलती है। लेकिन, निजी क्षेत्र की कंपनियों ने तो पिछले महीने ही 50 किग्रा के बैग की कीमत 300 रुपये बढ़ा दी थी। उस समय डीएपी के 50 किग्रा के एक बैग की कीमत 1200 रुपये थी तो निजी क्षेत्र की कई कंपनियों ने ने इसका प्रिंट रेट 1,500 रुपये कर दिया था। अब जबकि इफको ने ही इसका दाम 1,900 रुपये कर दिया है तो अन्य कंपनियां भी ऐसा ही करेंगी।
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जिले में काफी संख्या में किसान इफको की डीएपी प्रयोग करते हैं। कृषि विभाग ने उर्वरक विक्रेताओं को डीएपी के पुराना स्टाक को बोरी पर प्रिंट रेट पर ही बेचने का फरमान जारी किया है।
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सहकारी क्षेत्र के इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर को ओपरेटिव की तरफ से 50 किग्रा बोरी के डीएपी की कीमतों में एकाएक 700 रुपये बढ़ा दिए से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है। किसानों की मानें तो फसलों के मूल्य का समर्थन मूल्य 58 प्रतिशत तो नहीं बढ़ता है, लेकिन डीएपी की कीमतों में 50 किग्रा वाले डीएपी बोरी का दाम 700 रुपये बढ़ा दिया गया है। अब तो खेती की लागत बढ़ जाने से लागत भी निकलना मुश्किल होगा। किसानों की मानें तो इफको तो सहकारी क्षेत्र की कंपनी है, जिस पर काफी हद तक सरकार की मर्जी चलती है। लेकिन, निजी क्षेत्र की कंपनियों ने तो पिछले महीने ही 50 किग्रा के बैग की कीमत 300 रुपये बढ़ा दी थी। उस समय डीएपी के 50 किग्रा के एक बैग की कीमत 1200 रुपये थी तो निजी क्षेत्र की कई कंपनियों ने ने इसका प्रिंट रेट 1,500 रुपये कर दिया था। अब जबकि इफको ने ही इसका दाम 1,900 रुपये कर दिया है तो अन्य कंपनियां भी ऐसा ही करेंगी।
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