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बुवाई से पहले बीज को संशोधित और उपचारित जरूर करें किसान
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मधुबन। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने किसानों को फसलों की बुवाई करने से पहले बीज को संशोधित और उपचारित करने की सलाह दी है। कहा है कि फसलों में बीजशोधन अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे फसलों को रोगों से सुरक्षित कर अधिक पैदावार ली जा सकती है। ऐसा करने से किसानों की आय दोगुनी हो सकेगी। बताया कि जनपद में फसलों को प्रतिवर्ष खरपतवारों, रोगों, कीटों तथा चूहों आदि से क्षति होती है। खरपतवारों के बाद सबसे अधिक क्षति रोगों से होती है। फसलों में लगे रोग कभी-कभी रोग महामारी का रूप ले लेते हैं और फसल शत-प्रतिशत नष्ट हो जाती है। फसलों में रोग बीज, मृदा, वायु, जल एवं कीटों के द्वारा फैलते हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि अपने घर पर रखे हुए बीज की बुवाई करना चाहते हैं तो बीज की अच्छे से साफ-सफाई करलें। छोटे एवं टूटे हुए बीजों को अलग कर, साफ व बड़े आकार के बीजों को बोने के लिए चुनें। बुवाई से पहले बीज को किसी भी फफूंदीनाशक कीटनाशक रसायन से उपचारित कर लें।
किसान अपनी फसलों को कीट व रोगों के प्रकोप से बचाने के लिए बुवाई से पहले भूमि की जांच भी करा लें। जिला कृषि अधिकारी ने कहा है कि बीज और भूमि का शोधन कर बुवाई की जाएगी तो फसलें कीट व रोग से सुरक्षित रहेंगी। बीज के उपचार के लिए ट्राईकोडर्मा हारजेनियम 4-6 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज अथवा कार्बेंडाजाइम 2 से 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम अथवा थीरम दो ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाने के साथ उपचारित करके ही बुवाई करें।
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किसान अपनी फसलों को कीट व रोगों के प्रकोप से बचाने के लिए बुवाई से पहले भूमि की जांच भी करा लें। जिला कृषि अधिकारी ने कहा है कि बीज और भूमि का शोधन कर बुवाई की जाएगी तो फसलें कीट व रोग से सुरक्षित रहेंगी। बीज के उपचार के लिए ट्राईकोडर्मा हारजेनियम 4-6 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज अथवा कार्बेंडाजाइम 2 से 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम अथवा थीरम दो ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाने के साथ उपचारित करके ही बुवाई करें।
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