मऊ। सरकार की तरफ से चिकित्सा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने की तमाम कवायद विभागीय उदासीनता से फ्लाप हो रही हैं। जिला अस्पताल में अव्यवस्था का बोलबाला है। कहने तो अस्पताल में 298 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए, लेकिन लगभग 225 तरह की दवाएं ही अस्पताल में उपलब्ध हैं। जरुरी दवाएं न होने से एक ही दवा सभी रोगों में लिखी जा रही है। उधर, मंगलवार को भी कई चिकित्सक ओपीडी में से नदारद रहे। इंतजार करते-करते थक गए मरीज वापस लौट गए। शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल प्रशासन के नोटिस बोर्ड पर प्रतिदिन दवाओं की उपलब्धता की सूची लगाती है। इसके अनुसार अस्पताल की ओर से मरीजों को 298 तरह की दवाएं मुफ्त में देनी हैं, लेकिन इनमें से लगभग 225 तरह की दवाएं ही अस्पताल में उपलब्ध हैं। हालत यह है कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं नहीं होने से मरीजों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। चिकित्सक मरीजों को पर्ची पर एक ही दवाएं सभी रोगों में लिख रहे हैं। खांसी, हार्ट सहित गंभीर रोगों की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित दिनचर्या से मरीजों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। मंगलवार को ईएनटी कक्ष में चिकित्सक नदारद रहे। कक्ष संख्या आठ से फिजिशियन गायब मिले। मरीज उनके आने की राह ताकते रहे। कक्ष संख्या चार तथा कक्ष संख्या पांच मेें भी चिकित्सक नहीं बैठे जबकि मरीज खासी देर तक उनका इंतजार करते रहे। मरीजों का कहना था कि चिकित्सक कब आते हैं कब चले जाते हैं पता नहीं चलता है। ओपीडी कक्ष पर चिकित्सकों के उपलब्ध न होने की सूचना अंकित नहीं की जाती है। सीएमओ डॉ. एसएन दुब ने कहा कि शासन से निर्धारित समय सीमा तक चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य है। कार्य में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। औचक निरीक्षण में अनियमितता मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिला अस्पताल में बंद ईएनटी चिकित्सक का कक्ष, परेशान मरीज।संवाद- फोटो : MAU