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घर पर मिले सुविधाएं तो क्यों जाएं बाहर

Thu, 14 May 2020 09:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 09:33 PM IST
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Facilities available at home, why go out
मऊ। जीविकोपार्जन के लिए बाहर गए और फिर कोरोना महामारी फैलने पर बसी बसाई गृहस्थी को छोड़कर घर आने के लिए मजबूर हुए मजदूर सरकार की घोषणाओं से अनभिज्ञ हैं। उनका तो बस यही कहना है कि यदि उन्हें घर पर ही सुविधाएं मिलें तो वह जलालत झेलने बाहर ही क्यों जाएं।
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रानीपुर ब्लाक के धर्मसीपुर गांव निवासी चंदन भारद्वाज ने बताया कि वह पुणे महाराष्ट्र की एक कंपनी में फीटर है। कोरोना के चलते कंपनी बंद हो गई तो घर का रुख किया। कहा कि उसे सरकार की योजना की कोई जानकारी नहीं है। अगर सुविधा मिले तो वह जाए तो अपना घर छोड़कर क्यों बाहर जाए। यहीं के निवासी जोगेंदर ने बताया कि एक व्यक्ति को स्वास्थ्य शिक्षा और सुरक्षा के अलावा और क्या चाहिए। जब सरकार हेल्थ चेकपकर खाने को राशन और ईएसआई से बीमा करा ही रही है तो किस बात के लिए दूसरे प्रांत जाना। कोपागंज ब्लाक के सहरोज गांव निवासी पंकज ने बताया कि ईएसआई की सुविधा के साथ घर पर रहते हुए नियुक्ति पत्र के साथ रोजगार मिले तो फिर इससे बेहतर क्या होगा। पंकज राजकोट गुजरात में मजदूरी करता था। बडराव ब्लाक के नदवा सराय निवासी अरविंद ने कहा कि सरकार ने यदि ऐसी व्यवस्था शुरु से की होती तो आज वह जलील होकर वापस न लौटता। अरविंद पुणे में वेल्डिंग का काम करता था। महामारी में धंधा ठप हुआ तो घर लौट आया।
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घोसी ब्लाक के पकड़ी गांव निवासी अमरजीत निषाद और धर्मू राजभर ने कहा कि सरकार की योजना की उसे कोई जानकारी नहीं है, यदि सरकार हम मजदूरों को इतनी सुविधा दे तो कभी भूलकर भी हम लोग परदेश न जाए। दोनों सूरत में पेंटिंग का काम करते थे। लेकिन महामारी में काम ठप होने पर दोनों को घर वापस लौटना पड़ा।
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बताते चले प्रदेश सरकार ने सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र देकर रोजगार देने, साल में एक बार हेल्थ चेकअप कराने, असंगठित क्षेत्र को सोशल सेक्योरिटी स्कीम का लाभ देने और ईएसआईसी सुविधा लागू करने पर काम शुरु करने जा रही। रात में काम करने पर महिलाओं के लिए अलग तरह की सुरक्षा व्यवस्था होगी। इसके अलावा मनरेगा के तहत मजदूरों की मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये की है। जो अप्रैल माह से लागू भी हो चुका है। बाहर से चलकर आने वाले प्रवासी मजदूरों को दो माह तक सरकार की तरफ से 5 किलो गेहूं-चावल दिया जाएगा। इसके बाद अगस्त माह से एक देश एक राशन कार्ड योजना के तहत उन्हें सुविधाएं निरंतर उपलब्ध होगी।
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