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झुलसने और दम घुटने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 01 Jul 2015 12:11 AM IST
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घोसी कोतवाली के मझवारा कस्बे में सोमवार की देर रात आग से झुलसने और दम घुटने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोगों की हालत गंभीर है। उन्हें वाराणसी रेफर किया गया है। मृतकों में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल हैं। यह हृदयविदारक घटना बंद कमरे में गैस सिलेंडर के रिसाव के बाद आग लगने से हुई।
देवरिया के बरहज गांव के मूल निवासी कृष्णा जायसवाल की घोसी के मझवारा बाजार में कपड़े की छोटी सी दूकान है। दूकान के पीछे कमरे में वह पत्नी शकुंतला और चार बच्चों के साथ रहता था। उसके एक ही कमरे में किचन से लेकर रहने-खाने और सोने तक की व्यवस्था थी। इसी कमरे में दो गैस सिलेंडर भी रखे थे।
इनमें से एक से गैस का रिसाव हो रहा था लेकिन इसका पता किसी को नहीं चल पाया। सोमवार की रात कृष्णा जायसवाल भी दूकान बंद करने के बाद पूरे परिवार के साथ सो गया। रात में बिजली चली गई। ऐसे में परिवार का ही कोई सदस्य मच्छरों से बचने के लिए क्वायल जलाने उठा। उसके माचिस जलाते ही आग धधक उठी।
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बंद कमरे में आग और धुएं के चलते सभी का दम घुटने लगा। वे चिल्लाकर इधर-उधर भागने लगे। दरवाजा और खिड़की बंद होने और रात के लगभग दो बजे का समय होने से पड़ोस के लोग भी नहीं पहुंच पाए। कृष्णा की साली अंकिता ने किसी तरह दरवाजा खोला तब जाकर चार लोग बाहर निकल पाए।
पड़ोसियों ने चारों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजवाया। वहां उनकी हालत चिंताजनक देख चिकित्सकों ने वाराणसी रेफर कर दिया। दरवाजा खुलने के बाद शोर सुनकर मझवारा चौकी से पुलिस और आसपास के लोग जुट गए।
फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही लोगों ने पानी और बालू फेंककर किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक कृष्णा जायसवाल, उसके पुत्रों में कुबेर (8), आनंद (6) और पुत्री दीक्षा (2) की मौत हो चुकी थी, जबकि पत्नी शकुंतला (40) की वाराणसी ले जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई।
झुलसे लोगों में कृष्णा की पुत्री मोहिनी (10), शकुंतला की बहन अंकिता (20) और उसके भाई की पुत्री मुस्कान (10) काो वाराण्ासी रेफर किया गया, जहां मोहिनी और मुस्कान की माौत हाो गइऱ्ई ।
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देवरिया के बरहज गांव के मूल निवासी कृष्णा जायसवाल की घोसी के मझवारा बाजार में कपड़े की छोटी सी दूकान है। दूकान के पीछे कमरे में वह पत्नी शकुंतला और चार बच्चों के साथ रहता था। उसके एक ही कमरे में किचन से लेकर रहने-खाने और सोने तक की व्यवस्था थी। इसी कमरे में दो गैस सिलेंडर भी रखे थे।
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इनमें से एक से गैस का रिसाव हो रहा था लेकिन इसका पता किसी को नहीं चल पाया। सोमवार की रात कृष्णा जायसवाल भी दूकान बंद करने के बाद पूरे परिवार के साथ सो गया। रात में बिजली चली गई। ऐसे में परिवार का ही कोई सदस्य मच्छरों से बचने के लिए क्वायल जलाने उठा। उसके माचिस जलाते ही आग धधक उठी।
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बंद कमरे में आग और धुएं के चलते सभी का दम घुटने लगा। वे चिल्लाकर इधर-उधर भागने लगे। दरवाजा और खिड़की बंद होने और रात के लगभग दो बजे का समय होने से पड़ोस के लोग भी नहीं पहुंच पाए। कृष्णा की साली अंकिता ने किसी तरह दरवाजा खोला तब जाकर चार लोग बाहर निकल पाए।
पड़ोसियों ने चारों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजवाया। वहां उनकी हालत चिंताजनक देख चिकित्सकों ने वाराणसी रेफर कर दिया। दरवाजा खुलने के बाद शोर सुनकर मझवारा चौकी से पुलिस और आसपास के लोग जुट गए।
फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही लोगों ने पानी और बालू फेंककर किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक कृष्णा जायसवाल, उसके पुत्रों में कुबेर (8), आनंद (6) और पुत्री दीक्षा (2) की मौत हो चुकी थी, जबकि पत्नी शकुंतला (40) की वाराणसी ले जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई।
झुलसे लोगों में कृष्णा की पुत्री मोहिनी (10), शकुंतला की बहन अंकिता (20) और उसके भाई की पुत्री मुस्कान (10) काो वाराण्ासी रेफर किया गया, जहां मोहिनी और मुस्कान की माौत हाो गइऱ्ई ।