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ओडीओपी योजना लागू होने के चार वर्ष बाद भी बदहाल है जिले का साड़ी उद्योग
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मऊ। सरकार की तरफ से शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक उत्पाद योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो रहा है। योजना लागू होने के चार वर्ष बाद भी जिले का साड़ी उद्योग बदहाल है। यहां प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना नहीं की जा सकी है। अधिकांश बुनकर परंपरागत तरीके से ही बुनाई कर रहे हैं। इससे उनको वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। आला अधिकारी सबकुछ जानकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
एक जमाना था जब जिले के साड़ी उद्योग को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यूपी के मैनचेस्टर की संज्ञा दी थी। यहां की साड़ी देश-विदेश में मांग थी। लेकिन तकनीकी को न अपनाने से साड़ी उद्योग की बदहाली शुरू हो गई। मऊ जिले की साड़ी को ब्रांड बनाने के लिए सरकार की तरफ से चार वर्ष पूर्व एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की। योजना के तहत टेक्सटाइल को शामिल किया गया। विभाग की तरफ से योजना का व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार न होने तथा सही तरीके से योजना का क्रियान्वयन न होने से युवाओं का रुझान टेक्सटाइल की तरफ नाम मात्र ही है। यहां मऊ नगर, वलीदपुर, घोसी, कोपागंज, मुहम्मदाबादगोहना सहित विभिन्न क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक पावरलूम पर काफी संख्या में बुनकर साड़ी बुनाई करते हैं। सालाना कारोबार लगभग 500 करोड़ से अधिक का होता है। अधिकांश बुनकर टेक्नालॉजी का इस्तेमाल न कर परंपरागत तरीके से ही साड़ी बुनाई करते हैं। यही नहीं बुनकरों की काफी तादाद आढ़तियों की ही साड़ी बुनाई करती है। इससे बुनकरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। इससे उनकी दशा दिन प्रति दिन दयनीय होती जा रही है। खुद अपना पावरलूम लगाकर बुनाई करने वाले बुनकरों की संख्या नाम मात्र है।
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एक जमाना था जब जिले के साड़ी उद्योग को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यूपी के मैनचेस्टर की संज्ञा दी थी। यहां की साड़ी देश-विदेश में मांग थी। लेकिन तकनीकी को न अपनाने से साड़ी उद्योग की बदहाली शुरू हो गई। मऊ जिले की साड़ी को ब्रांड बनाने के लिए सरकार की तरफ से चार वर्ष पूर्व एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की। योजना के तहत टेक्सटाइल को शामिल किया गया। विभाग की तरफ से योजना का व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार न होने तथा सही तरीके से योजना का क्रियान्वयन न होने से युवाओं का रुझान टेक्सटाइल की तरफ नाम मात्र ही है। यहां मऊ नगर, वलीदपुर, घोसी, कोपागंज, मुहम्मदाबादगोहना सहित विभिन्न क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक पावरलूम पर काफी संख्या में बुनकर साड़ी बुनाई करते हैं। सालाना कारोबार लगभग 500 करोड़ से अधिक का होता है। अधिकांश बुनकर टेक्नालॉजी का इस्तेमाल न कर परंपरागत तरीके से ही साड़ी बुनाई करते हैं। यही नहीं बुनकरों की काफी तादाद आढ़तियों की ही साड़ी बुनाई करती है। इससे बुनकरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। इससे उनकी दशा दिन प्रति दिन दयनीय होती जा रही है। खुद अपना पावरलूम लगाकर बुनाई करने वाले बुनकरों की संख्या नाम मात्र है।
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