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पर्यावरण संरक्षण से निकला विचार बाजार में छाया
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sat, 23 Jan 2016 11:53 PM IST
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कड़ी मेहनत तथा समर्पण से नगर स्थित औद्योगिक आस्थान के उद्यमी बालकृष्ण थरड ने पूर्वांचल में एक मुकाम हासिल किया है। पर्यावरण संरक्षण से निकला विचार आज बालकृष्ण उद्योग का बड़ा रूप ले चुका है।
वे सीमेंट के चौखट बनवाते हैं। उन्हें इसके लिए उद्योग निदेशालय ने कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है। इसके लिए उन्हें शनिवार को भी निदेशालय कानपुर ने थ्री स्टार उद्यमी के रूप में अलंकृत किया। यह पुरस्कार कलेक्ट्रेट के सभागार में सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय तथा महाप्रबंधक कमलेश श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से प्रदान किया।
बालकृष्ण उद्योग जनपद ही नहीं पूरे पूर्वांचल मेें स्थापित है। बालकृष्ण थरड ने वर्ष 1993 में रांची से अब उत्तराखंड से इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। अमेरिका जाने की योजना बना रहे थे। इसी बीच पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से चिंतित उनके पिता भवानी शंकर थरड ने सीमेंटेड चौखट का उद्योग लगाने का सुझाव दिया।
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पिता की इच्छा को देखते हुए रिसर्च शुरू किया। पांच वर्ष की कड़ी मेहनत के बल पर सफलता मिली। इसमें केंद्रीय भवन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों तथा आईटी बीचएचू का काफी सहयोग रहा। वर्ष 1998 में बालकृष्ण उद्योग की स्थापना हुई। सर्वप्रथम बालाजी चौखट का उत्पादन शुरू किया।
सरकारी अधिकारियों के तकनीकी रुकावटों के बाद भी उद्योग को ऊंचाई पर लाने में कामयाब रहे। अब उनके बालाजी डेस्क बेंच, बालाजी खंभा, बालाजी चौकी, बाउंड्रीवाल सहित कई प्रोडक्ट पूर्वांचल में लोकप्रिय है।
आम लोगों द्वारा इन वस्तुओं के अपनाने से प्रतिवर्ष 10 हजार पेड़ों की कटान रोककर यह उद्योग पर्यावरण मित्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। उद्योग लगने के चार वर्ष बाद उद्योग निदेशालय ने वर्ष 2004 में मंडलीय लघु उद्योग पुरस्कार से उन्हें नवाजा।
वर्ष 2015 में उद्योग निदेशालय ने थ्री स्टार प्रमाण पत्र से नवाजा। इस संबंध में बाल कृष्ण उद्योग के चेयरमैन व उद्यमी बालकृष्ण थरड ने बताया कि पिताजी से आर्थिक संबल तथा सहयोग मिला। विभागीय अधिकारियों का सहयोग मिले तो लघु उद्योग को नई ऊंचाई मिल सकती है। स्टार्टअप को लघु उद्यमियों के लिए वरदान होगा।
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वे सीमेंट के चौखट बनवाते हैं। उन्हें इसके लिए उद्योग निदेशालय ने कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है। इसके लिए उन्हें शनिवार को भी निदेशालय कानपुर ने थ्री स्टार उद्यमी के रूप में अलंकृत किया। यह पुरस्कार कलेक्ट्रेट के सभागार में सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय तथा महाप्रबंधक कमलेश श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से प्रदान किया।
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बालकृष्ण उद्योग जनपद ही नहीं पूरे पूर्वांचल मेें स्थापित है। बालकृष्ण थरड ने वर्ष 1993 में रांची से अब उत्तराखंड से इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। अमेरिका जाने की योजना बना रहे थे। इसी बीच पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से चिंतित उनके पिता भवानी शंकर थरड ने सीमेंटेड चौखट का उद्योग लगाने का सुझाव दिया।
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पिता की इच्छा को देखते हुए रिसर्च शुरू किया। पांच वर्ष की कड़ी मेहनत के बल पर सफलता मिली। इसमें केंद्रीय भवन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों तथा आईटी बीचएचू का काफी सहयोग रहा। वर्ष 1998 में बालकृष्ण उद्योग की स्थापना हुई। सर्वप्रथम बालाजी चौखट का उत्पादन शुरू किया।
सरकारी अधिकारियों के तकनीकी रुकावटों के बाद भी उद्योग को ऊंचाई पर लाने में कामयाब रहे। अब उनके बालाजी डेस्क बेंच, बालाजी खंभा, बालाजी चौकी, बाउंड्रीवाल सहित कई प्रोडक्ट पूर्वांचल में लोकप्रिय है।
आम लोगों द्वारा इन वस्तुओं के अपनाने से प्रतिवर्ष 10 हजार पेड़ों की कटान रोककर यह उद्योग पर्यावरण मित्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। उद्योग लगने के चार वर्ष बाद उद्योग निदेशालय ने वर्ष 2004 में मंडलीय लघु उद्योग पुरस्कार से उन्हें नवाजा।
वर्ष 2015 में उद्योग निदेशालय ने थ्री स्टार प्रमाण पत्र से नवाजा। इस संबंध में बाल कृष्ण उद्योग के चेयरमैन व उद्यमी बालकृष्ण थरड ने बताया कि पिताजी से आर्थिक संबल तथा सहयोग मिला। विभागीय अधिकारियों का सहयोग मिले तो लघु उद्योग को नई ऊंचाई मिल सकती है। स्टार्टअप को लघु उद्यमियों के लिए वरदान होगा।