मऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में बिजली कर्मियों तथा अवर अभियंताओं ने शीर्ष ऊर्जा निगम प्रबंधन एवं सरकार के निजीकरण के मुद्दे पर जिला मुख्यालय स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में मंगलवार को प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रदेश में निजीकरण का प्रयोग पूर्व में आगरा व नोएडा में पहले ही विफल हो चुका है। सीएजी के आडिट में भी टोरेंट पावर कंपनी को आगरा के विद्युत व्यवस्था देने के बाद विद्युत निगम का भारी घाटा हुआ है। आज भी दक्षिणांचल बिजली निगम महंगे दर पर बिजली खरीद कर टोरेंट पावर कंपनी को सस्ती दर पर बिजली की आपूर्ति कर रही है जिसके कारण बिजली निगम को प्रत्येक माह 162 करोड़ रुपये का प्रतिमाह नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार, शीर्ष ऊर्जा निगम प्रबंधन चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को निजी हाथों में देने का फैसला लिया गया है, जो पूरी तरह से न तो प्रदेश के हित में है, न ही उपभोक्ताओं के हित में है न तो कर्मचारियों के हित में हैं। जनविरोधी कर्मचारी विरोधी फैसले को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र के तमाम कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर 18 सितंबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होंगे। प्रदर्शन करने वालों में सूर्यदेव पांडेय, रविंद्र सिंह यादव, संजय कुमार, रघुनंदन यादव, सुशील सोनी, आशुतोष त्रिपाठी, अनिल राय आदि शामिल रहे।