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दयाशंकर सिंह को सशर्त जमानत
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:10 AM IST
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बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में जेल में निरुद्घ दयाशंकर सिंह की जमानत अर्जी कोर्ट नंबर चार अपर जिला जज डा. अजय कुमार ने शनिवार को स्वीकार कर ली। कोर्ट ने 50-50 हजार रुपये के दो जमानतदार और 50 हजार के व्यक्तिगत मुचलका पर अभियुक्त को रिहा करने का आदेश दिया। आदेश शाम पांच बजे तक जेल नहीं पहुंचने के कारण रिहाई नहीं हो सकी। अब रविवार को रिहाई होगी।
आरोप के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के भाजपा कार्यालय पर 20 जुलाई को प्रेसवार्ता के दौरान दयाशंकर सिंह ने बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर अभद्र टिप्पणी की थी। इस मामले में बसपा के राष्ट्रीय सचिव मेवालाल गौतम की तहरीर पर लखनऊ स्थित हजरतगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। 28 अगस्त को लखनऊ की पुलिस टीम ने दयाशंकर को बिहार के बक्सर से गिरफ्तार किया था। तब से वे जेल में है।
शनिवार को दयाशंकर सिंह की तरफ से दाखिल अर्जी पर कोर्ट नंबर चार एडीजे डॉ. अजय कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे ने दयाशंकर सिंह की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने 50-50 हजार रुपये के दो जमानतदार और 50 हजार का व्यक्तिगत मुचलका दाखिल करने और मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के बाद अभियुक्त को रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद सीजेएम कोर्ट में बंधपत्र और शपथपत्र दाखिल किया गया।
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जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट आने के बाद सीजेएम प्रमोद कुमार सिंह ने दयाशंकर सिंह की रिहाई का आदेश जेल अधीक्षक मऊ को भेजा। साथ ही शर्त रखी कि दयाशंकर सिंह प्रत्येक नियत तिथि पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से या अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होते रहेगा। केस खुलने और आरोप बनने तथा बयान के समय व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होता रहेगा। जमानत का दुरुपयोग नहीं करेगा। अभियोजन के गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे।
दयाशंकर सिंह की तरफ से उसके अधिवक्ता श्रीकृष्ण सिंह, फतेह बहादुुर सिंह, सदानंद राय, सूर्यनाथ यादव, प्रदीप सिंह और दरोगा सिंह तथा अभियोजन की तरफ से एसपीओ रामध्यान पांडेय, एसपीओ छेदी लाल गुप्ता के साथ वीरेंद्र बहादुर पाल, गनी अहमद ने अपने तर्क रखे।
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आरोप के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के भाजपा कार्यालय पर 20 जुलाई को प्रेसवार्ता के दौरान दयाशंकर सिंह ने बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर अभद्र टिप्पणी की थी। इस मामले में बसपा के राष्ट्रीय सचिव मेवालाल गौतम की तहरीर पर लखनऊ स्थित हजरतगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। 28 अगस्त को लखनऊ की पुलिस टीम ने दयाशंकर को बिहार के बक्सर से गिरफ्तार किया था। तब से वे जेल में है।
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शनिवार को दयाशंकर सिंह की तरफ से दाखिल अर्जी पर कोर्ट नंबर चार एडीजे डॉ. अजय कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे ने दयाशंकर सिंह की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने 50-50 हजार रुपये के दो जमानतदार और 50 हजार का व्यक्तिगत मुचलका दाखिल करने और मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के बाद अभियुक्त को रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद सीजेएम कोर्ट में बंधपत्र और शपथपत्र दाखिल किया गया।
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जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट आने के बाद सीजेएम प्रमोद कुमार सिंह ने दयाशंकर सिंह की रिहाई का आदेश जेल अधीक्षक मऊ को भेजा। साथ ही शर्त रखी कि दयाशंकर सिंह प्रत्येक नियत तिथि पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से या अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होते रहेगा। केस खुलने और आरोप बनने तथा बयान के समय व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होता रहेगा। जमानत का दुरुपयोग नहीं करेगा। अभियोजन के गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे।
दयाशंकर सिंह की तरफ से उसके अधिवक्ता श्रीकृष्ण सिंह, फतेह बहादुुर सिंह, सदानंद राय, सूर्यनाथ यादव, प्रदीप सिंह और दरोगा सिंह तथा अभियोजन की तरफ से एसपीओ रामध्यान पांडेय, एसपीओ छेदी लाल गुप्ता के साथ वीरेंद्र बहादुर पाल, गनी अहमद ने अपने तर्क रखे।