{"_id":"60edd6228ebc3eed417183f8","slug":"despite-all-the-exercise-347-community-toilets-are-incomplete-in-the-district-mau-news-vns6002793200","type":"story","status":"publish","title_hn":"तमाम कवायद के बावजूद जिले में 347 सामुदायिक शौचालय अधूरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तमाम कवायद के बावजूद जिले में 347 सामुदायिक शौचालय अधूरे
विज्ञापन
मऊ। शासन की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल गांवों में सामुुदायिक शौचालयों के निर्माण की योजना का हाल जिले में बहुत खराब है। जिले में आधे से अधिक गांवों के सामुदायिक शौचालय अधूरे हैं। यह हाल तब है जब ग्राम पंचायतों के भंग हो जाने के बाद भी सामुुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए धन निकालने की अनुमति थी। जिले के 347 गांवों में अभी सामुदायिक शौचालय का निर्माण अधर में लटका है।
शासन के निर्देश पर जिले के 671 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण होना था। प्रत्येक सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए पांच लाख 71 हजार की धनराशि खर्च करने का प्रावधान है। इस प्रकार जिले की सभी ग्राम प्रचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए 38 करोड़ 31 लाख 41 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। जनवरी 2020 के पहले से ही शासन का जोर पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पर था।
25 दिसंबर 2020 को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया तो इन्हें भंग कर दिया गया। गांवों में विकास योजनाओं की कमान अब एडीओ पंचायत के हाथों में आ गई। फिर भी प्रशासकों की देखरेख में इन दोनों कार्यों को प्रमुखता से कराया जाना था। इनके निर्माण के लिए खातों से धन निकालने की छूट थी। इसके बावजूद जिले के 671 ग्राम पंचायतों में से महज 324 ग्राम पंचायतों में सामुुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो सका।
विज्ञापन
शेष 347 ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालयों का काम अभी भी अधूरा है। इनमें से पांच सामुदायिक शौचालयों के लिए चयनित भूमि विवादित होने के चलते कार्य अधूरा है। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के दस ग्राम पंचायतों के सामुुदायिक शौचालय मानक के विपरीत बने पाए गए हैं। परदहा ब्लाक के 51 में से 20 गांवों में गाइड लाइन के प्रतिकूल सामुदायिक शौचालय बना दिए गए हैं। परदहा ब्लाक के बगली पिजड़ा में केवल नींव तक निर्माण हुआ है। ताहिरपुर सलाहाबाद में 30 प्रतिशत काम अधूरा है।
हरदसपुर में शौचालय तो बन गया है लेकिन उसमें ताला बंद है। जिले में चार सामुदायिक शौचालय को छोड़कर पूरे बन चुके शेष शौचालयों में ताले बंद हैं। सामुदायिक शौचालय निर्माण में लापरवाही के चलते दोहरीघाट और फतेहपुर मंडाव के एडीओ पंचायत को निलंबित किया जा चुका है।
रुचि न लेने से चयन प्रकिया है लटकी
मऊ। सामुदायिक शौचालयों को संचालित करने के लिए स्वयं सहायता समूहों का चयन होना है। लेकिन चयन की प्रक्रिया पूरी न होने के चलते शौचालयों में ताले बंद हैं। इस बाबत जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों का चयन की प्रकिया पूरी करने को कहा गया है लेकिन स्वयं सहायता समूहों के रुचि न लेने
31 जुलाई तक पूरे करने का निर्देश
जिले के सभी ग्राम पंचायतों में 31 जुलाई तक सामुदायिक शौचालयों का कार्य पूरा करने का निर्देश जिलाधिकारी ने दिया है। रविवार को डीएम ने जिले में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में प्रगति की समीक्षा किया था। इस दौरान खराब प्रगति देख काफी नाराजगी जताया था।
इस बाबत एडीपीआरओ संजय मिश्र ने बताया कि सभी ब्लाकों के एडीओ पंचायत को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि 31 जुलाई तक हर हाल में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाए।
विज्ञापन
शासन के निर्देश पर जिले के 671 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण होना था। प्रत्येक सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए पांच लाख 71 हजार की धनराशि खर्च करने का प्रावधान है। इस प्रकार जिले की सभी ग्राम प्रचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए 38 करोड़ 31 लाख 41 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। जनवरी 2020 के पहले से ही शासन का जोर पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पर था।
विज्ञापन
25 दिसंबर 2020 को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया तो इन्हें भंग कर दिया गया। गांवों में विकास योजनाओं की कमान अब एडीओ पंचायत के हाथों में आ गई। फिर भी प्रशासकों की देखरेख में इन दोनों कार्यों को प्रमुखता से कराया जाना था। इनके निर्माण के लिए खातों से धन निकालने की छूट थी। इसके बावजूद जिले के 671 ग्राम पंचायतों में से महज 324 ग्राम पंचायतों में सामुुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो सका।
विज्ञापन
शेष 347 ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालयों का काम अभी भी अधूरा है। इनमें से पांच सामुदायिक शौचालयों के लिए चयनित भूमि विवादित होने के चलते कार्य अधूरा है। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के दस ग्राम पंचायतों के सामुुदायिक शौचालय मानक के विपरीत बने पाए गए हैं। परदहा ब्लाक के 51 में से 20 गांवों में गाइड लाइन के प्रतिकूल सामुदायिक शौचालय बना दिए गए हैं। परदहा ब्लाक के बगली पिजड़ा में केवल नींव तक निर्माण हुआ है। ताहिरपुर सलाहाबाद में 30 प्रतिशत काम अधूरा है।
हरदसपुर में शौचालय तो बन गया है लेकिन उसमें ताला बंद है। जिले में चार सामुदायिक शौचालय को छोड़कर पूरे बन चुके शेष शौचालयों में ताले बंद हैं। सामुदायिक शौचालय निर्माण में लापरवाही के चलते दोहरीघाट और फतेहपुर मंडाव के एडीओ पंचायत को निलंबित किया जा चुका है।
रुचि न लेने से चयन प्रकिया है लटकी
मऊ। सामुदायिक शौचालयों को संचालित करने के लिए स्वयं सहायता समूहों का चयन होना है। लेकिन चयन की प्रक्रिया पूरी न होने के चलते शौचालयों में ताले बंद हैं। इस बाबत जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों का चयन की प्रकिया पूरी करने को कहा गया है लेकिन स्वयं सहायता समूहों के रुचि न लेने
31 जुलाई तक पूरे करने का निर्देश
जिले के सभी ग्राम पंचायतों में 31 जुलाई तक सामुदायिक शौचालयों का कार्य पूरा करने का निर्देश जिलाधिकारी ने दिया है। रविवार को डीएम ने जिले में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में प्रगति की समीक्षा किया था। इस दौरान खराब प्रगति देख काफी नाराजगी जताया था।
इस बाबत एडीपीआरओ संजय मिश्र ने बताया कि सभी ब्लाकों के एडीओ पंचायत को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि 31 जुलाई तक हर हाल में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाए।