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करोड़ांे खर्च, हालात जस के तस
Mon, 17 Dec 2018 10:52 PM IST
पवन सिंह
mau
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Published by: पवन सिंह
Updated Mon, 17 Dec 2018 10:52 PM IST
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बड़रांव ब्लाक के महमूदपुर पलिया गांव में क्षतिग्रस्त शौचालय का फर्श दिखाता युवक।
- फोटो : mau
बड़रांव ब्लाक के सभी 72 गांवों को ओडीफ घोषित किया जा चुका है। स्वच्छता अभियान के तहत बड़रांव ब्लाक के इन गांवों में स्वच्छता के लिए 20 करोड़ 76 हजार रुपये खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन इतने सारे रुपये खर्च करने के बाद भी स्थिति पहले जैसी है। गांवों की सड़कों, नहरों के किनारे पर गंदगी दिख रही है। लोग सुबह शाम खुले में शौच जा रहे हैं। ओडीएफ योजना हवाई है। शौचालयों का निर्माण भी जैसे तैसे कराया गया है। कहीं छत नहीं है तो कहीं फर्श ही टूट गए हैं तो कहीं दरवाजे नहीं हैं।
ब्लाक क्षेत्र के 72 ग्राम पंचायतों में कुल 16673 शौचालय स्वच्छता अभियान के तहत बनवाने के दावे किए गए हैं। इसमें कई ग्राम पंचायतों में गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाई गई हैं।यही वजह है कि शौचालय प्रयोग के लायक नहीं हैं। ऐसी बानगी क्षेत्र के पलिया महमूदपुर गांव में देखने को मिली। लाभार्थी रामकिशुन के अनुसार, उनका शौचालय योजना के तहत एक माह पहले संबंधित ग्राम प्रधान ने खुद बनवाया है।
मगर, निर्माण के एक सप्ताह बाद ही शौचालय का फर्श टूट गया, वह अब प्रयोग के लायक नहीं है।इसी तरह ब्लाक क्षेत्र के अमिला, चुम्मानार अहिरानी, हेमई पिपरी, भटमीला, करपिया मलिक, हरधौली, च्यूटीडांड़, चंद्रापार, नदवासराय, भिखारीपुर आदि ग्राम पंचायतों में भी ओडीएफ योजना के तहत बने शौचालय गुणवत्ताहीन हैं। एक सच्चाई यह भी है कि अधिकांश लोग शौच के लिए बाहर खुले में ही जाने के आदी हैं। ऐसे में सरकार की गांवों को ओडीएफ करने की योजना अमली जामा नहीं पहन पा रही।
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ब्लाक क्षेत्र के 72 ग्राम पंचायतों में कुल 16673 शौचालय स्वच्छता अभियान के तहत बनवाने के दावे किए गए हैं। इसमें कई ग्राम पंचायतों में गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाई गई हैं।यही वजह है कि शौचालय प्रयोग के लायक नहीं हैं। ऐसी बानगी क्षेत्र के पलिया महमूदपुर गांव में देखने को मिली। लाभार्थी रामकिशुन के अनुसार, उनका शौचालय योजना के तहत एक माह पहले संबंधित ग्राम प्रधान ने खुद बनवाया है।
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मगर, निर्माण के एक सप्ताह बाद ही शौचालय का फर्श टूट गया, वह अब प्रयोग के लायक नहीं है।इसी तरह ब्लाक क्षेत्र के अमिला, चुम्मानार अहिरानी, हेमई पिपरी, भटमीला, करपिया मलिक, हरधौली, च्यूटीडांड़, चंद्रापार, नदवासराय, भिखारीपुर आदि ग्राम पंचायतों में भी ओडीएफ योजना के तहत बने शौचालय गुणवत्ताहीन हैं। एक सच्चाई यह भी है कि अधिकांश लोग शौच के लिए बाहर खुले में ही जाने के आदी हैं। ऐसे में सरकार की गांवों को ओडीएफ करने की योजना अमली जामा नहीं पहन पा रही।
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