मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली क्षेत्र के देवसीपुर गांव निवासी अजीत सिंह की लखनऊ में हत्या सटीक मुखबिरी के चलते हुई है। वह हमेशा बुलेट प्रूफ कार में ही चलते थे। अजीत सिंह पर 19 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। जिला बदर घोषित किया जा चुका था। अजीत सिंह मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के ज्येष्ठ प्रमुख रह चुके थे।
लखनऊ हत्याकांड : अजीत सिंह हमेशा चलते थे बुलेट प्रूफ कार से, फिर भी हत्या...
कुंटू ने गिरधारी को भदीड़ से बीडीसी का चुनाव भी लड़ाया था लेकिन अपनी करीबी को चुनाव जिता कर अजीत ने कुंटू के हाथ से बाजी छीन ली थी। बताते हैं कि कुंटू सिंह इससे भी अजीत सिंह से बहुत खार खाए थे। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के प्रमुख की सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाने के बाद 2005 में अजीत सिंह ने अपने पत्नी रानू सिंह को चुनाव लड़ाया था, जिसमें वह विजयी हुई थीं।
इसके पूर्व अजीत सिंह खुद भी मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के ज्येष्ठ प्रमुख रह चुके थे। पिछली बार मोहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक प्रमुख की सीट पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हो गई तो अजीत सिंह ने अपनी करीबी मनभाती को प्रत्याशी बनाया और जीत हासिल की।
वह महिला प्रमुख भले ही निर्वाचित हो गई थीं लेकिन सारा कार्यभार अजीत सिंह ही देखते थे । अजीत अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत चौकन्ना रहते थे। हमेशा बुलेट प्रूफ वाहन में ही चलते थे लेकिन बुधवार की शाम को लखनऊ में सटीक मुखबिरी के चलते उनकी हत्या कर दी गई। इसके साथ ही हमेशा उनके साथ साए की तरह चलने वाला मोहर सिंह भी गोली लगने से घायल हुआ है। अजीत सिंह इस समय जिला बदर घोषित किया जा चुका है।
कभी अजीत और कुंटू थे जिगरी दोस्त, बाद में बढ़ गईं दूरियां
अजीत सिंह और कुंटू सिंह कभी जिगरी दोस्त हुआ करते थे, लेकिन संपत्ति के बंटवारे में दोनों के बीच मतभेद हो गए। सगड़ी के तत्कालीन विधायक सर्वेश सिंह सीपू की हत्या की साजिश रचे जाने की मुखबिरी अजीत सिंह ने की थी जिसके बाद आजमगढ़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नवीन अरोड़ा ने विधायक की सुरक्षा बढ़ा दी थी। हालांकि बाद में सीपू सिंह की हत्या कर दी गई जिसमें कुंटू सिंह का नाम आया था। विधायक हत्याकांड में अजीत सिंह गवाह भी थे।
ब्लाक प्रमुख पद पर कब्जा करने की कुंटू सिंह की लालसा अजीत सिंह की वजह से धरी की धरी रह गई और उधर संपत्ति के बंटवारे को लेकर अजीत और कुंटू के बीच दूरियां बढ़ती गई और कभी जिगरी दोस्त रहे कुंटू और अजीत एक दूसरे के दुश्मन बन गए। कुंटू अजीत को अपने वर्चस्व की बादशाहत में रोड़ा मानने लगा। इसे अजीत भी समझते थे और कुंटू से सावधान रहते थे।