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महिला अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत
Updated Sat, 08 Sep 2018 11:33 PM IST
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बढुआगोदाम। क्षेत्र के ताजोपुर स्थित फातिमा स्कूल के प्रांगण में बालिका दिवस का आयोजन किया गया। इसमें अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर बालिकाओं को शिक्षित करने पर बल दिया गया। इस अवसर पर बच्चों ने बालिका शिक्षा तथा सामाजिक परिवेश से संबंधित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की।
समूह गान नृत्य नाटिका जुल्म अब न सहूंगी सखी, आंसू के संग अब ना बहेगी सखी ने उपस्थित जन समुदाय को भाव विभोर कर दिया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, शोषण, भ्रूण हत्या, सामाजिक अपराध, अशिक्षा आदि पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर वर्तमान परिवेश को दर्शाया। बेटा वंश है तो बेटी अंश है, बेटा आन है तो बेटी गुमान है, बेटा भाग्य है तो बेटी भाग्य विधाता है आदि नाट्य प्रस्तुति पेश किया। छात्राओं ने संत मदर टेरेसा, मलाला यूसुफजई, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण बेदी, पीवी सिंधु आदि जैसी महिलाओं को अपना आदर्श मान कर उनके पदचिह्नों पर चलने का संदेश दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एकिका सिंह ने कहा कि भ्रूण हत्या के प्रमुख कारण वंश परंपरा और दहेज आदि हैं। कहा कि घर से समाज तक महिला अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। कहा कि महिला सम्मान तथा सुरक्षा के लिए पारिवारिक तथा सामाजिक परिवेश में परिवर्तन लाना होगा। इस अवसर पर प्रधानाचार्या सिस्टर सिंथिया पषान ने शिक्षित होकर इस बदलते परिवेश में दृढ़ आत्मविश्वास, और शालीनता के साथ समाज निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागी बालिकाओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मुख्य अतिथि ने पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
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समूह गान नृत्य नाटिका जुल्म अब न सहूंगी सखी, आंसू के संग अब ना बहेगी सखी ने उपस्थित जन समुदाय को भाव विभोर कर दिया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, शोषण, भ्रूण हत्या, सामाजिक अपराध, अशिक्षा आदि पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर वर्तमान परिवेश को दर्शाया। बेटा वंश है तो बेटी अंश है, बेटा आन है तो बेटी गुमान है, बेटा भाग्य है तो बेटी भाग्य विधाता है आदि नाट्य प्रस्तुति पेश किया। छात्राओं ने संत मदर टेरेसा, मलाला यूसुफजई, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण बेदी, पीवी सिंधु आदि जैसी महिलाओं को अपना आदर्श मान कर उनके पदचिह्नों पर चलने का संदेश दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एकिका सिंह ने कहा कि भ्रूण हत्या के प्रमुख कारण वंश परंपरा और दहेज आदि हैं। कहा कि घर से समाज तक महिला अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। कहा कि महिला सम्मान तथा सुरक्षा के लिए पारिवारिक तथा सामाजिक परिवेश में परिवर्तन लाना होगा। इस अवसर पर प्रधानाचार्या सिस्टर सिंथिया पषान ने शिक्षित होकर इस बदलते परिवेश में दृढ़ आत्मविश्वास, और शालीनता के साथ समाज निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागी बालिकाओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मुख्य अतिथि ने पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
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