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एडीजी साहेब की एक नजर की दरकार थी बदहाल कोतवाली को
Updated Fri, 27 Apr 2018 11:16 PM IST
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आम तौर पर अधिकारियों के वार्षिक, मासिक समीक्षा की तिथि तय होने पर अधिकारियों द्वारा ही क्या दिखाना है और क्या छुपाना है? पहले से ही तय कर लिया जाता है। ऐसा ही कुछ एडीजी वाराणसी के शु्क्रवार को आयोजित दौरे में भी देखने को मिला। जिला मुख्यालय पर पुलिस लाइन में समीक्षा बैठक के बाद अधिकारी को मुुख्यालय पर मौजूद बदहाल शहर कोतवाली का निरीक्षण न कराकर सीधे मुहम्मदाबा गोहना कोतवाली ले जाया गया।
अब कोतवाली की व्यथा को क्या बयां करना मुख्य बाजार में रेलवे क्रासिंग को पार करते ही मौजूद कोतवाली के पास इतनी जगह नहीं है कि वह जरूरत पड़ने पर किसी पकड़े गए बड़े वाहन को अपने परिसर में खड़ा कर सकें। ऐसा नहीं कि जगह की कमी है, जगह बहुत है लेकिन कमी है तो नेतृत्व की जो कोतवाली परिसर में सड़ रहें सैकड़ों वाहनों का डिपोजल करा सकें। जबकि कोतवाली से लगे सीओ का भी दफ्तर है, लेकिन सब लोग चुप हैं। आरक्षियों को फ्रेेश होने के लिए कायदे का शौचालय तक परिसर में नहीं है। बैैरक के नाम पर मौजूद एक कमरे में चारपाई डालकर सिपाही रहते है। परिवार रखने के लिए कोतवाली में बनाई गई कालोनी की दशा बदत्तर है । अग्निशमन कार्यालय के साथ विभाग का निर्माण न होने से उसी में अग्निशमन के वाहन भी आड़े तिरछे खड़े किए जाते है। कहीं अचानक आग लग गई और वाहन को जाना पड़ा तो रेलवे फाटक बंद होने पर वाहन सायरन बजाते हुए वही रुक जाता है। फरियादियों के साथ मित्रवत व्यवहार करने का आदेश शासन के साथ उच्चाधिकारी दिए हैं। लेकिन कोतवाली पहुंचने वाले फरियादियों के लिए आगंतुक कक्ष तक नही है। ऐसे में एडीजीसाहब एक नजर बदहाल कोतवाली की तरफ देख लेते तो शायद कुछ भला हो जाता।
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अब कोतवाली की व्यथा को क्या बयां करना मुख्य बाजार में रेलवे क्रासिंग को पार करते ही मौजूद कोतवाली के पास इतनी जगह नहीं है कि वह जरूरत पड़ने पर किसी पकड़े गए बड़े वाहन को अपने परिसर में खड़ा कर सकें। ऐसा नहीं कि जगह की कमी है, जगह बहुत है लेकिन कमी है तो नेतृत्व की जो कोतवाली परिसर में सड़ रहें सैकड़ों वाहनों का डिपोजल करा सकें। जबकि कोतवाली से लगे सीओ का भी दफ्तर है, लेकिन सब लोग चुप हैं। आरक्षियों को फ्रेेश होने के लिए कायदे का शौचालय तक परिसर में नहीं है। बैैरक के नाम पर मौजूद एक कमरे में चारपाई डालकर सिपाही रहते है। परिवार रखने के लिए कोतवाली में बनाई गई कालोनी की दशा बदत्तर है । अग्निशमन कार्यालय के साथ विभाग का निर्माण न होने से उसी में अग्निशमन के वाहन भी आड़े तिरछे खड़े किए जाते है। कहीं अचानक आग लग गई और वाहन को जाना पड़ा तो रेलवे फाटक बंद होने पर वाहन सायरन बजाते हुए वही रुक जाता है। फरियादियों के साथ मित्रवत व्यवहार करने का आदेश शासन के साथ उच्चाधिकारी दिए हैं। लेकिन कोतवाली पहुंचने वाले फरियादियों के लिए आगंतुक कक्ष तक नही है। ऐसे में एडीजीसाहब एक नजर बदहाल कोतवाली की तरफ देख लेते तो शायद कुछ भला हो जाता।
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