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मऊ: सीएम योगी के खिलाफ दाखिल परिवाद खारिज, जानिए किस बयान से जुड़ा है ये मामला
Sun, 20 Mar 2022 04:40 PM IST
उत्पल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 20 Mar 2022 04:40 PM IST
सार
मऊ के दोहरीघाट निवासी नवल किशोर शर्मा पुत्र देवनाथ शर्मा ने सीजेएम कोर्ट में एक परिवाद दाखिल किया था। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महंत गोरक्षपीठ को आरोपी बनाते हुए उन्हें विचारण के लिए तलब करने अनुरोध किया था।
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : Social Media
विस्तार
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ एमपी-एमएलए कोर्ट मऊ श्वेता चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध दाखिल परिवाद को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि घटना स्थल राजस्थान प्रांत के अलवर जिले के मालाखेडा का है। मऊ न्यायालय को प्रस्तुत परिवाद को सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं है।
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एसीजेएम ने क्षेत्राधिकार के अभाव में परिवाद को धारा 203 सीआरपीसी के अंतर्गत खारिज कर दिया। दोहरीघाट निवासी नवल किशोर शर्मा पुत्र देवनाथ शर्मा ने सीजेएम कोर्ट में एक परिवाद दाखिल किया था। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महंत गोरक्षपीठ को आरोपी बनाते हुए उन्हें विचारण के लिए तलब करने अनुरोध किया था।
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नवल किशोर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान सार्वजनिक सभा में 28 नवंबर 2018 को अलवर जिले के मालाखेड़ा में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बजरंगबली ऐसे लोक देवता हैं, जो स्वयं वनवासी हैं, गिरवासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं। इनके इस बयान से परिवादी के धार्मिक भावनाओं को ठेस एवं आघात पहुंचा। साथ ही इष्ट देव बजरंगबली में श्रद्धा रखने वाले समुदायों की आस्था आहत हुई।
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