मऊ। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की उदासीनता का खामियाजा बच्चों की शिक्षा तथा विकास कार्यो पर पड़ रहा है। मार्च 2021 तक 517 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी स्कूलों की तर्ज पर उच्चीकृत होना था। बजट के साथ टेंडर की प्रक्रिया भी हो चुकी थी, लेकिन संक्रमण के चलते विभागीय उदासीनता से कार्यदायी संस्था कार्य पूरा नहीं कर सकी। जबकि वित्तीय वर्ष में कार्य पूूरा न होने से बजट लैप्स हो गया था। अब मौजूदा समय में अभी बजट जारी नहीं हो सका है। ऐसे में उच्चीकरण का कार्य फिलहाल कागजों पर है। जिले में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग नौ ब्लाकों में 2587 आंगनबाड़ी केंद्रो का संचालन करता है। जिसमें दो लाख 20 हजार से अधिक बच्चें पंजीकृत है। इन केंद्रों के बच्चों को अब भी नीचे बैठकर पढ़ना पड़ता है। इसको देखते हुए विभाग ने दो वर्षों से यहां 800 से ज्यादा केद्रों को प्री प्राइमरी स्कूल के तर्ज पर संचालित करने के लिए उच्चीकृत करने की योजना तैयार की है। विभाग की योजना के अनुसार, 2021 में 517 केंद्रों में कुर्सी के साथ पेयजल, शौचालय, विद्युतीकरण की समस्या दूर करना था। इसके अलावा किताबें रखने के लिए मेज के साथ मनोरंजन के लिए झूले आदि सामान लगाए जाने थे। यह कार्य मार्च 2021 तक हो जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। विभागीय सूत्रों की माने तो इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी करने के साथ बजट अवमुक्त भी किया गया था, लेकिन इसमें काफी देर कर दी गई, जब तक यह कार्य होता तब तक कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के चलते वित्तीय माह भी समाप्त हो गया था। इसके चलते कार्यदायी संस्था ने कार्य करने में असर्मथता जता दी। कार्य शुरू न होने से बजट भी लैप्स हो गया। ऐसी ही स्थिति वर्ष 2020 में भी 200 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों को उच्चीकृत करने में हुई। पहले तो विभाग ने हीलाहवाली की गई, जब तक कार्य शुरू होता जब तक कोरोना संक्रमण की पहली लहर शुरू होने से लॉकडाउन घोषित होकर कार्य टल गया। उधर, वर्तमान में जब संक्रमण का संकट खत्म हुआ तो दुबारा बजट न आने से यह कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। विभागीय अधिकारी कार्य को लेकर सक्रियता दिखाते तो आंगनबाड़ी केंद्रों के उच्चीकरण का कार्य पूरा हो जाता, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। उधर कार्य पूरा होने पर इन केंद्रों में पंजीकृत करीब 40 हजार से ज्यादा बच्चों को स्कूलों की तर्ज पर मिलनी वाली सुविधा मिलने के साथ आंगनबाड़ी केंद्र भी आर्कषक रूप में नजर आते। इससे काफी हद तक केंद्रों पर आने वाले बच्चों के अभिभावकों पर इसको लेकर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की संख्या में बढ़ोत्तरी भी होती।