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अहंकार करने वाला व्यक्ति कभी नहीं हो सकता है भगवान का प्रिय : संपूर्णानंद
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बरहदपुर कुटी पर चल रहे मानस कथा में कथा सुनाते कथा वाचक संपूर्णानंद।संवाद
मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे के बरहदपुर कुटी पर चल रहे मानस कथा एवं कृष्ण रासलीला के सातवें दिन बाल व्यास कथा वाचक संपूर्णानंद ने सुंदरकांड के लंका दहन की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि अहंकार और मोह करने वाला व्यक्ति कभी भी भगवान का प्रिय नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी भी चीज पर अहंकार करता है, तो उसका नाश अवश्य होता है। कहा कि सीता जी की खोज में जब हनुमान लंका पहुंचे, तो वहां रावण की मोह रूपी अशोक वाटिका का भव्य रूप दिखाई दिया।
प्रभु श्रीराम की कृपा से हनुमान जी ने उसे अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया। अर्थात रावण का मोह खत्म कर दिया। इसी प्रकार सोने की लंका पर रावण अहंकार करता था, उस अहंकार रूपी लंका को भी हनुमान जी ने जलाकर राख कर दिया।
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बताया कि मानव जन्म परोपकार, भलाई, सेवा, धर्म की रक्षा और समाज को हमेशा सही रास्ता दिखाने के लिए मिला है। इस संसार में सभी प्रकार के कर्म होते हैं। यह मनुष्य के ऊपर निर्भर करता है कि वह सत्कर्म या कुकर्म किस मार्ग पर चलना चाहता है।
कथा के प्रारंभ में आजमगढ़ से आए सुरेशानंद जी महाराज ने भी मंगलमय व्याख्या से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के दौरान संतोष सिंह, कन्हैया सिंह, लक्ष्मी गुप्ता, तेजनाथ मौर्य आदि ने योगदान दिया।
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उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी भी चीज पर अहंकार करता है, तो उसका नाश अवश्य होता है। कहा कि सीता जी की खोज में जब हनुमान लंका पहुंचे, तो वहां रावण की मोह रूपी अशोक वाटिका का भव्य रूप दिखाई दिया।
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प्रभु श्रीराम की कृपा से हनुमान जी ने उसे अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया। अर्थात रावण का मोह खत्म कर दिया। इसी प्रकार सोने की लंका पर रावण अहंकार करता था, उस अहंकार रूपी लंका को भी हनुमान जी ने जलाकर राख कर दिया।
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बताया कि मानव जन्म परोपकार, भलाई, सेवा, धर्म की रक्षा और समाज को हमेशा सही रास्ता दिखाने के लिए मिला है। इस संसार में सभी प्रकार के कर्म होते हैं। यह मनुष्य के ऊपर निर्भर करता है कि वह सत्कर्म या कुकर्म किस मार्ग पर चलना चाहता है।
कथा के प्रारंभ में आजमगढ़ से आए सुरेशानंद जी महाराज ने भी मंगलमय व्याख्या से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के दौरान संतोष सिंह, कन्हैया सिंह, लक्ष्मी गुप्ता, तेजनाथ मौर्य आदि ने योगदान दिया।