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खतरे का सफर : 6 सीटर ऑटो में बैठ रहे 10 बच्चे
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नगर के गाजीपुर तिराहा से होकर छुट्टी के बाद बच्चों को ई रिक्शा से लेकर घर जाता चालक।संवाद
स्कूली बच्चों के परिवहन में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। ज्यादा कमाई के लालच में ऑटो चालक बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह हाल तब है जब जिले में पांच दिन से परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान में अब तक 70 से अधिक स्कूली वाहनों का चालान किया जा चुका है लेकिन इन वाहनों पर इस संयुक्त टीम का कोई ध्यान नहीं है, जबकि ये वाहन नगर के मुख्य मार्ग से दो समय गुजरते हैं।
परिवहन विभाग का दावा है कि वह हर दिन निगरानी कर रहा है। हाल यह है कि 6 सीटर ऑटो में 10 बच्चे बैठकर स्कूल आ-जा रहे हैं। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार वाहन में निर्धारित सीट क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाना प्रतिबंधित है।
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जिले में दस हजार से ज्यादा ऑटो और 15 हजार से ज्यादा ई-रिक्शों का संचालन हो रहा है। इसमें ज्यादातर ऑटो-ई-रिक्शा सुबह और दोपहर के समय स्कूल से बच्चों को ले जाते और ले आते हैं। बाकी समय वे यात्रियों को ढोते हैं।
ऑटो और ई-रिक्शा में चालक सीटों के अलावा अपने अगल-बगल बच्चों को बैठाते हैं। कई वाहनों में तो भारी स्कूल बैग के कारण बच्चों के बैठने तक की जगह नहीं रहती है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। विक्रम ऑटो छह सीटर है। इसमें चालक पीछे चार बच्चों को बैठाते हैं।
बीच में चार बच्चों को और चालक की सीट के बगल में एक बच्चे को बैठाने के साथ-साथ सभी के बैग टंगे रहते हैं। वहीं, छोटी ऑटो में तीन सवारी बैठाने का नियम है। ऑटो चालक पीछे चार बच्चों को और सीट के बगल में भी बैठाते हैं। इन ऑटो चालकों को न तो खुद की जान की परवाह है और न ही इन बच्चों की।
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केस एक
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जब इन वाहनों को लेकर ग्राउंड पर पहुंची तो देखा कि नगर के ताजोपुर स्थित एक निजी स्कूल के छात्र छुट्टी होने के बाद भी ऑटो से निकल रहे हैं। इसी स्कूल के कई छात्र सुबह में ऑटो में ओवरलोड संख्या में सवार होकर स्कूल जाते दिखे थे।
केस दो
नगर के बकवल मोड़ से भी ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। इसके साथ ही नगर के पुलिस लाइन के पास से होकर बिना पंजीकृत वैन में क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को छुट्टी के बाद घर ले जाया जा रहा था।
केस तीन
वहीं, ई-रिक्शा भी बच्चों को नगर के गाजीपुर तिराहा से लेकर जा रहा था। इसके साथ शहर में कई स्थानों से ऑटो, ई-रिक्शा और वैन से क्षमता से अधिक बच्चों को ढोया जा रहा था।
ऑटो-ई-रिक्शा में सवारी बैठाने के लिए ये है नियम
विक्रम ऑटो : अधिकांश वाहनों में चालक के अतिरिक्त 6 यात्रियों की अनुमति होती है।
छोटी ऑटो थ्री सीटर : चालक के अतिरिक्त तीन यात्रियों की अनुमति होती है।
ई-रिक्शा : चालक के अतिरिक्त चार यात्रियों की अनुमति होती है।
यातायात पुलिस की मौजूदगी में भी क्षमता से ज्यादा बच्चों को ढो रहे वाहन
स्कूल खुलने और छुट्टी के समय शहर के प्रमुख तिराहों और चौराहों पर यातायात पुलिस की तैनाती रहती है। बावजूद इसके क्षमता से ज्यादा बच्चों को लेकर ऑटो और ई-रिक्शा बेखौफ सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ओवरलोड वाहन पुलिस की मौजूदगी में ही गुजर रहे हैं तो उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
बर्जन-- -
बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई की जाए। ऑटो चालक क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर चलते हैं, इससे परेशानी होती है।
-अमरेश सिंह, अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष
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ऑटो और ई-रिक्शा में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है। कई बच्चे दरवाजे और किनारे तक बैठे रहते हैं। वाहन चालकों पर कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। स्कूल प्रबंधन भी मानकों वाले वाहन ही स्कूल में लगाएं। - अरविंद मूर्ती, समाजसेवी
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अभियान में अब तक 70 से अधिक स्कूली वाहनों का चालान किया जा चुका है लेकिन इन वाहनों पर इस संयुक्त टीम का कोई ध्यान नहीं है, जबकि ये वाहन नगर के मुख्य मार्ग से दो समय गुजरते हैं।
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परिवहन विभाग का दावा है कि वह हर दिन निगरानी कर रहा है। हाल यह है कि 6 सीटर ऑटो में 10 बच्चे बैठकर स्कूल आ-जा रहे हैं। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार वाहन में निर्धारित सीट क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाना प्रतिबंधित है।
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जिले में दस हजार से ज्यादा ऑटो और 15 हजार से ज्यादा ई-रिक्शों का संचालन हो रहा है। इसमें ज्यादातर ऑटो-ई-रिक्शा सुबह और दोपहर के समय स्कूल से बच्चों को ले जाते और ले आते हैं। बाकी समय वे यात्रियों को ढोते हैं।
ऑटो और ई-रिक्शा में चालक सीटों के अलावा अपने अगल-बगल बच्चों को बैठाते हैं। कई वाहनों में तो भारी स्कूल बैग के कारण बच्चों के बैठने तक की जगह नहीं रहती है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। विक्रम ऑटो छह सीटर है। इसमें चालक पीछे चार बच्चों को बैठाते हैं।
बीच में चार बच्चों को और चालक की सीट के बगल में एक बच्चे को बैठाने के साथ-साथ सभी के बैग टंगे रहते हैं। वहीं, छोटी ऑटो में तीन सवारी बैठाने का नियम है। ऑटो चालक पीछे चार बच्चों को और सीट के बगल में भी बैठाते हैं। इन ऑटो चालकों को न तो खुद की जान की परवाह है और न ही इन बच्चों की।
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केस एक
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जब इन वाहनों को लेकर ग्राउंड पर पहुंची तो देखा कि नगर के ताजोपुर स्थित एक निजी स्कूल के छात्र छुट्टी होने के बाद भी ऑटो से निकल रहे हैं। इसी स्कूल के कई छात्र सुबह में ऑटो में ओवरलोड संख्या में सवार होकर स्कूल जाते दिखे थे।
केस दो
नगर के बकवल मोड़ से भी ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। इसके साथ ही नगर के पुलिस लाइन के पास से होकर बिना पंजीकृत वैन में क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को छुट्टी के बाद घर ले जाया जा रहा था।
केस तीन
वहीं, ई-रिक्शा भी बच्चों को नगर के गाजीपुर तिराहा से लेकर जा रहा था। इसके साथ शहर में कई स्थानों से ऑटो, ई-रिक्शा और वैन से क्षमता से अधिक बच्चों को ढोया जा रहा था।
ऑटो-ई-रिक्शा में सवारी बैठाने के लिए ये है नियम
विक्रम ऑटो : अधिकांश वाहनों में चालक के अतिरिक्त 6 यात्रियों की अनुमति होती है।
छोटी ऑटो थ्री सीटर : चालक के अतिरिक्त तीन यात्रियों की अनुमति होती है।
ई-रिक्शा : चालक के अतिरिक्त चार यात्रियों की अनुमति होती है।
यातायात पुलिस की मौजूदगी में भी क्षमता से ज्यादा बच्चों को ढो रहे वाहन
स्कूल खुलने और छुट्टी के समय शहर के प्रमुख तिराहों और चौराहों पर यातायात पुलिस की तैनाती रहती है। बावजूद इसके क्षमता से ज्यादा बच्चों को लेकर ऑटो और ई-रिक्शा बेखौफ सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ओवरलोड वाहन पुलिस की मौजूदगी में ही गुजर रहे हैं तो उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
बर्जन
बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई की जाए। ऑटो चालक क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर चलते हैं, इससे परेशानी होती है।
-अमरेश सिंह, अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष
ऑटो और ई-रिक्शा में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है। कई बच्चे दरवाजे और किनारे तक बैठे रहते हैं। वाहन चालकों पर कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। स्कूल प्रबंधन भी मानकों वाले वाहन ही स्कूल में लगाएं। - अरविंद मूर्ती, समाजसेवी

नगर के गाजीपुर तिराहा से होकर छुट्टी के बाद बच्चों को ई रिक्शा से लेकर घर जाता चालक।संवाद

नगर के गाजीपुर तिराहा से होकर छुट्टी के बाद बच्चों को ई रिक्शा से लेकर घर जाता चालक।संवाद