{"_id":"61-121813","slug":"Mau-121813-61","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन ब्लाकों में खतरनाक स्तर पर पहुंची जीवांश कार्बन की मात्रा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन ब्लाकों में खतरनाक स्तर पर पहुंची जीवांश कार्बन की मात्रा
Mau
Updated Fri, 14 Feb 2014 05:44 AM IST
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मऊ। नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के सभागार में कृषक प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. डीपी सिंह ने किया।
इस मौके पर मुख्य वैज्ञानिक डा. डीपी सिंह ने कहा कि रतनपुरा, रानीपुर, परदहां में जीवांश कार्बन की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे मेें आवश्यकता है कि किसान संतुलित उर्वरकों के साथ जीवांश कार्बन के लिए जैविक खादों का प्रयोग अवश्य करे। नीम लेपित यूरिया के प्रयोग पर जोर दिया। इसी क्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. बीके सिंह ने जैविक उर्वरकों की जानकारी के क्रम मेें पीएसवी कल्चर, एजेटोवैक्टर, राइजोवियम, नीलहरित शैवाल की वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग विधि तथा तकनीकी चर्चा की। इसी प्रकार केंद्र के वैज्ञानिक डा. एनके सिंह ने किसानों को मृदा परीक्षण के लिए फसल एवं बागों में मृदा नमूना एकत्र करने की तकनीकी जानकारी दी। बताया कि यदि गेहूं की फसल में पीलापन दिखाई दे तो एक प्रतिशत सल्फर का छिड़काव किया जाए। इसी क्रम में डा. एसके सिंह ने जैविक खेती तथा पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला।
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इस मौके पर मुख्य वैज्ञानिक डा. डीपी सिंह ने कहा कि रतनपुरा, रानीपुर, परदहां में जीवांश कार्बन की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे मेें आवश्यकता है कि किसान संतुलित उर्वरकों के साथ जीवांश कार्बन के लिए जैविक खादों का प्रयोग अवश्य करे। नीम लेपित यूरिया के प्रयोग पर जोर दिया। इसी क्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. बीके सिंह ने जैविक उर्वरकों की जानकारी के क्रम मेें पीएसवी कल्चर, एजेटोवैक्टर, राइजोवियम, नीलहरित शैवाल की वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग विधि तथा तकनीकी चर्चा की। इसी प्रकार केंद्र के वैज्ञानिक डा. एनके सिंह ने किसानों को मृदा परीक्षण के लिए फसल एवं बागों में मृदा नमूना एकत्र करने की तकनीकी जानकारी दी। बताया कि यदि गेहूं की फसल में पीलापन दिखाई दे तो एक प्रतिशत सल्फर का छिड़काव किया जाए। इसी क्रम में डा. एसके सिंह ने जैविक खेती तथा पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला।
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