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हत्या के मामले में चार को आजीवन कारावास
Mau
Updated Sat, 29 Jun 2013 05:30 AM IST
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मऊ। शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविंद्रनाथ मिश्र ने हत्या व हत्या के प्रयास के मामले में नामजद चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। चारों को बीस-बीस हजार रुपये अर्थदंड की भी सजा दी गई। चारों आरोपियों को हत्या के प्रयास के एक अन्य मामले में पांच वर्ष की सजा के साथ ही पांच-पांच हजार रुपया अर्थदंड की सजा मिली।
मधुबन थाना क्षेत्र के धरमपुर हाता गांव निवासी रामदरस यादव पुत्र पूर्णवासी यादव की तहरीर पर गांव के ही केवल यादव पुत्र बाढ़ू, मुन्ना यादव पुत्र श्रीकृष्ण यादव, साहब यादव पुत्र काशी यादव और दीपन यादव पुत्र नंदलाल यादव के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। वादी का आरोप था कि 10 फरवरी 2004 को जमीन व मुकदमे की रंजिश को लेकर उसके पिता पूर्नवासी यादव की हत्या ग्राम सिसवा के पास कर दी गई। घटना के समय वह भी अपने पिता के साथ था। पिता-पुत्र साइकिल से घर जा रहे थे। उसने मौके से भाग कर अपनी जान बचाई। पुलिस ने विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए प्रभारी डीजीसी कपिलदेव राय ने वादी सहित कुल पांच गवाहों को कोर्ट में प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। जिला जज ने दोनाें पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने बाद आरोपीगण केवल, मुन्ना, साहब और दीपन को हत्या और हत्या के प्रयास का दोषी पाया।
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मधुबन थाना क्षेत्र के धरमपुर हाता गांव निवासी रामदरस यादव पुत्र पूर्णवासी यादव की तहरीर पर गांव के ही केवल यादव पुत्र बाढ़ू, मुन्ना यादव पुत्र श्रीकृष्ण यादव, साहब यादव पुत्र काशी यादव और दीपन यादव पुत्र नंदलाल यादव के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। वादी का आरोप था कि 10 फरवरी 2004 को जमीन व मुकदमे की रंजिश को लेकर उसके पिता पूर्नवासी यादव की हत्या ग्राम सिसवा के पास कर दी गई। घटना के समय वह भी अपने पिता के साथ था। पिता-पुत्र साइकिल से घर जा रहे थे। उसने मौके से भाग कर अपनी जान बचाई। पुलिस ने विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए प्रभारी डीजीसी कपिलदेव राय ने वादी सहित कुल पांच गवाहों को कोर्ट में प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। जिला जज ने दोनाें पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने बाद आरोपीगण केवल, मुन्ना, साहब और दीपन को हत्या और हत्या के प्रयास का दोषी पाया।
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