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जनपद को सूखाग्रस्त घोषित कराने की मांग
Updated Sat, 21 Jul 2018 10:36 PM IST
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मऊ। जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष किसान नेता राकेश सिंह ने प्रदेश के राहत आयुक्त संजय कुमार को पत्रक देकर जनपद को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को राहत देने की मांग किया। पत्रक में कहा गया है कि 33 प्रतिशत क्षति पर ही सूखा ग्रस्त घोषित करने की गाइड लाइन है लेकिन जिले में अब तक 70 प्रतिशत क्षति हो चुकी है।
राहत आयुक्त को सौंपे गए पत्रक में कहा गया है कि जनपद में जून 2018 में सामान्य वर्षा 107.6 के सापेक्ष मात्र 17.5 मिमी, जुलाई 2018 में सामान्य वर्षा 298 मिमी के सापेक्ष मात्र 29.50 मिमी ही हुई है। 25 वर्षों में इस वर्ष जुलाई माह में पहली बार सबसे कम वर्षा हुई है। अब तक जून-जुलाई में सामान्य से 11.5 प्रतिशत ही बारिश हुई है। जून व जुलाई में तीन दिन ही बारिश बीस दिन के अंतराल पर हुई है।
मऊ जिले में कुल 70 नहरें हैं, इनमें से किसी भी नहर में पानी टेल तक नहीं गया है। इन 70 नहरों की जिले में कुल लम्बाई 422.494 किमी है जिले में भू जल स्तर जून व जुलाई माह में 20 से 25 मीटर है जबकि 2017 में 10 से 11 मीटर रहा। जिले के सभी नौ ब्लाक डार्क जोन में है। जिले में किसी तालाब, पोखरा, नाला, तालब व कुंएं में पानी नहीं है। इण्डिया मार्क टू हैण्डपंप तथा नीजी नलकूप पानी का जलस्तर नीचे जाने से पानी देना बंद कर चुके हैं। सिंचाई के लिये किसानों को सबमर्सिबल पंप लगाने पड़ रहे हैं। जिसकी बोरिंग 150 से 200 फीट करानी पड़ रही है। जिले में खरीफ की खेती लगभग 92500 हैक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 15000 हैक्टेयर भी धान की अब तक नहीं रोपाई हो पाई है। कहा गया है कि जिले में बिजली आपूर्ति लगातार पांच घंटा भी नहीं मिल रही है। अबतक 70 प्रतिशत क्षति हो चुकी है जबकि 33 प्रतिशत क्षति पर ही सूखा मैनुअल 2016 के निर्धारित मानक के अनुसार जनपद सूखा ग्रस्त घोषित हो जाना चाहिए। राहत आयुक्त ने कहा कि जिलाधिकारी कमिश्नर से पोर्ट मंगाकर शासन स्तर से उचित कार्यवाही का भरोसा दिया।
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राहत आयुक्त को सौंपे गए पत्रक में कहा गया है कि जनपद में जून 2018 में सामान्य वर्षा 107.6 के सापेक्ष मात्र 17.5 मिमी, जुलाई 2018 में सामान्य वर्षा 298 मिमी के सापेक्ष मात्र 29.50 मिमी ही हुई है। 25 वर्षों में इस वर्ष जुलाई माह में पहली बार सबसे कम वर्षा हुई है। अब तक जून-जुलाई में सामान्य से 11.5 प्रतिशत ही बारिश हुई है। जून व जुलाई में तीन दिन ही बारिश बीस दिन के अंतराल पर हुई है।
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मऊ जिले में कुल 70 नहरें हैं, इनमें से किसी भी नहर में पानी टेल तक नहीं गया है। इन 70 नहरों की जिले में कुल लम्बाई 422.494 किमी है जिले में भू जल स्तर जून व जुलाई माह में 20 से 25 मीटर है जबकि 2017 में 10 से 11 मीटर रहा। जिले के सभी नौ ब्लाक डार्क जोन में है। जिले में किसी तालाब, पोखरा, नाला, तालब व कुंएं में पानी नहीं है। इण्डिया मार्क टू हैण्डपंप तथा नीजी नलकूप पानी का जलस्तर नीचे जाने से पानी देना बंद कर चुके हैं। सिंचाई के लिये किसानों को सबमर्सिबल पंप लगाने पड़ रहे हैं। जिसकी बोरिंग 150 से 200 फीट करानी पड़ रही है। जिले में खरीफ की खेती लगभग 92500 हैक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 15000 हैक्टेयर भी धान की अब तक नहीं रोपाई हो पाई है। कहा गया है कि जिले में बिजली आपूर्ति लगातार पांच घंटा भी नहीं मिल रही है। अबतक 70 प्रतिशत क्षति हो चुकी है जबकि 33 प्रतिशत क्षति पर ही सूखा मैनुअल 2016 के निर्धारित मानक के अनुसार जनपद सूखा ग्रस्त घोषित हो जाना चाहिए। राहत आयुक्त ने कहा कि जिलाधिकारी कमिश्नर से पोर्ट मंगाकर शासन स्तर से उचित कार्यवाही का भरोसा दिया।
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