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विश्व तंबाकू दिवस : जागरुकता के अभाव में तंबाकू सेवन पर नहीं लग पा रहा प्रभावी अंकुश
Updated Thu, 31 May 2018 12:03 AM IST
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मऊ। जिले में तंबाकू सेवन पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। ऐसे में जागरूकता का अभाव लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी और प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान के लिए सिर्फ कोरम ही पूरा किया जा रहा। यही वजह है कि लगातार लोग तंबाकू का सेवन कर रहे। जागरूकता अभियान कागजों पर चल रहा। जिले में गुटखा और तंबाकू का कारोबार प्रतिमाह तीन करोड़ रुपयों का होता है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से व्यापक पैमाने पर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित न होने से तंबाकू सेवन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। चिकित्सकों की मानें तो तंबाकू तथा धूम्रपान का सेवन कैंसर, दातों का सड़ना, पेट का अल्सर, बालों का झड़ना आदि बीमारियों को दावत दे रहा। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों के मरीजों के लिए जिला अस्पताल मेें एक कक्ष बनाया गया है। काउंसलर मरीजों की समस्या सुनता है और चिकित्सक से उपचार करवाने में मदद करता है। डेढ़ वर्ष के अंदर छह मरीज धूम्रपान छोड़ने के लिए इलाज करा रहे हैं। विभाग की तरफ से जागरुकता के लिए प्रति सप्ताह तीन कैंप लगाए जाते हैं। इसके अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जा रही है। इसके बावजूद तंबाकू और धूम्रपान के सेवन के प्रति युवाओं का आकर्षण कम नहीं हो रहा है। 20 घंटे मुंह में गुटखा रखने वाला दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र का महेंद्र यादव, श्रीप्रकाश अब इस दुनिया में नहीं रहा। अत्यधिक गुटखा खाने से हुए मुख कैंसर ने उसकी जिंदगी छीन ली। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से देश में प्रतिवर्ष नौ लाख लोगों की मौत हो जाती है।
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