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मधुबन में फायर स्टेशन की मंजूरी के बाद कोई कवायद नहीं
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मधुबन और घोसी तहसील का लगभग 137 वर्ग किलोमीटर का घाघरा नदी का तटवर्ती इलाका क्षेत्रफल पूरी तरह से भगवान भरोसे है। इस भू भाग के देवारावासियों को बाढ़ और आग की विभीषिका से हर साल जूझना पड़ता है। बाढ़ और आग दोनों के लिए अतिसंवेदनशील देवारांचल में घाघरा नदी के बाढ़ और गर्मी के दिनों में आग से निपटने की कोई सार्थक पहल नहीं की गई है। आजादी के 70 सालों बाद भी इस क्षेत्र में आग पर काबू पाने के लिए फायर स्टेशन भी नहीं बन सका है। अत्यंत सीमित संसाधनों से इन क्षेत्र में होने वाली आगलगी की घटनाओं पर काबू पाने के प्रयास किए जाते हैं। इससे प्रति वर्ष करोड़ों की क्षति होती है।शासन ने मधुबन के पास कटघरा शंकर में फायर स्टेशन बनाने के लिए स्वीकृति दी है। कार्यदायी संस्था भी नियुक्त कर दी गई है। आठ करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए गए हैं। दस लाख रुपये कार्यदायी संस्था को दे भी दिए गए हैं। लेकिन साल भर बाद भी फायर स्टेशन निर्माण की कोई कवायद नहीं की गई है। चिह्नित स्थल पर एक अदद बोर्ड तक नहीं लगाया गया है।
मधुबन और घोसी तहसील का देवारांचल इलाका मार्च से लेकर जून तक की अवधि में आगलगी की घटनाओं को लेकर काफी संवेदनशील रहता है। देवारा क्षेत्र में लोगों के अधिकांश घरा घास फूस से बने होते हैं। मार्च के बाद गर्मी बढ़ने के साथ शार्ट सर्किट अथवा अन्य कारणों से आसग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। गेहूं की पकी फसलों के साथ घर गृहस्थी के सामानों की क्षति हो जाती है। पिछले साल मार्च से जून की अवधि में आगलगी की कुल 144 घटनाएं हुए थीं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत अगलगी की घटनाएं केेवल देवारा क्षेत्र में हुई थीं। इनमें घरों, फसलों,नगदी और अन्य गृहस्थी के लगभग दो करोड़ की संपत्तियों का नुकसान हुआ था। लेकिन इसके बावजूद न तो शासन और न ही जनप्रतिनिधि अथवा न ही प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ज्वलंत मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाया। पिछले साल ही देवारांचल में आगलगी की घटनाओं में होने वाली क्षतियों काक कम करने के लिए मधुबन के कटघरा शंकर में मधुबन बेल्थरा रोड मार्ग के किनारे रतोय ताल के निकट लगभग साढ़े चार हजार वर्ग फुट भूमि चिह्नित की गई है। इसके लिए उप्र पुलिस आवास निगम को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है। लेकिन विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि अभी तक इसके लिए टेंडर तक नहीं किए गए। चिह्नित भूमि परती पड़ी हुई है। इस संबंध में मुुख्य अग्नि शमन अधिकारी सुभाष कुमार कहते हैं कि उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। प्रकरण शासन स्तर का है। फायर स्टेशन क लिए आठ करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्यदायी संस्था भी नियुक्त की जा चुकी है।जल्दी ही टेंडर की प्रक्रिया शुरु होने के आसार हैं।
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मधुबन और घोसी तहसील का देवारांचल इलाका मार्च से लेकर जून तक की अवधि में आगलगी की घटनाओं को लेकर काफी संवेदनशील रहता है। देवारा क्षेत्र में लोगों के अधिकांश घरा घास फूस से बने होते हैं। मार्च के बाद गर्मी बढ़ने के साथ शार्ट सर्किट अथवा अन्य कारणों से आसग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। गेहूं की पकी फसलों के साथ घर गृहस्थी के सामानों की क्षति हो जाती है। पिछले साल मार्च से जून की अवधि में आगलगी की कुल 144 घटनाएं हुए थीं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत अगलगी की घटनाएं केेवल देवारा क्षेत्र में हुई थीं। इनमें घरों, फसलों,नगदी और अन्य गृहस्थी के लगभग दो करोड़ की संपत्तियों का नुकसान हुआ था। लेकिन इसके बावजूद न तो शासन और न ही जनप्रतिनिधि अथवा न ही प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ज्वलंत मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाया। पिछले साल ही देवारांचल में आगलगी की घटनाओं में होने वाली क्षतियों काक कम करने के लिए मधुबन के कटघरा शंकर में मधुबन बेल्थरा रोड मार्ग के किनारे रतोय ताल के निकट लगभग साढ़े चार हजार वर्ग फुट भूमि चिह्नित की गई है। इसके लिए उप्र पुलिस आवास निगम को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है। लेकिन विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि अभी तक इसके लिए टेंडर तक नहीं किए गए। चिह्नित भूमि परती पड़ी हुई है। इस संबंध में मुुख्य अग्नि शमन अधिकारी सुभाष कुमार कहते हैं कि उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। प्रकरण शासन स्तर का है। फायर स्टेशन क लिए आठ करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्यदायी संस्था भी नियुक्त की जा चुकी है।जल्दी ही टेंडर की प्रक्रिया शुरु होने के आसार हैं।
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