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आईएचएसडीपी के तहत 374 लाभार्थियों को मिली छत
Updated Mon, 01 Jan 2018 11:41 PM IST
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मऊ। इंटीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत नगर के चार मलीन बस्तियों के 374 लाभार्थियों को जहां आठ वर्ष इंतजार के बाद आवासीय योजना का लाभ मिला। वहीं शहरी गरीबों के लिए माया शासनकाल में शुरू की गई कांशी राम आवासीय योजना के तहत 948 मकान बनकर तैयार हैं, लेकिन बजट के अभाव में वाह्य सुविधाएं बहाल नहीं की जा सकी है। इससे आवास आवंटन की प्रक्रिया अधर में लटकी है। भीषण ठंड के मौसम में गरीबों को खुले आसामान में जीवन यापन करना पड़ रहा है।
नगर के मलीन बस्तियों में रहने वाले गरीबों, झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए सरकार की तरफ से वर्ष 2009 में आईएचएसडीपी शुरू किया गया। इसके तहत लाभार्थी को 2.25 लाख रुपये की लागत से मकान बनाने की जिम्मेदारी सीएनजीएस को सौंपी गई। योजना के लाभार्थियों पर नजर डाला जाए तो कोल्हाड़ में 246, छोटी बकवल मेें 36, बड़ी बकवल में 16, ताजोप़ुर डांड़ेपार में 46, ताजोपुर तिरबन्नी में 30 सहित 374 लाभार्थी शामिल हैं। इन आवासीय योजनाओं को पांच साल में ही पूरा कर लाभार्थियों को आवंटित करना था,लेकिन धन के अभाव में पूरा नहीं हो सका। फिर हर हाल में 30 नवंबर तक परियोजनाओं को पूरा करने के लिए शासन ने लाभार्थियों को आवास आवंटन शुरू करने का निर्देश दिया गया था। अब इस वर्ष निर्माण कार्य पूरा होने से 374 लोगों को सिर छिपाने की जगह मिली। वहीं माया शासनकाल में शुरू हुई काशी राम आवास योजना के तहत वर्षो पूर्व 948 आवास बनकर तैयार हैं। लेकिन बजट के अभाव में वाह्य सुविधाएं बहाल नहीं की जा सकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो वाह्य सुविधाएं बहाल करने के लिए पांच करोड़ के धन की व्यवस्था कर ली गई है। भीषण ठंड के मौसम में आवास होने के बाद भी आवंटन न होने से गरीबों को खुले आसमान में जीवन यापन करना पड़ रहा है। इस बाबत डूडा अधिकारी हरेराम यादव का कहना है कि आईएचएसडीपी के तहत 374 मकान आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं कांशी राम आवासीय योजना के तहत बने आवासों में शीघ्र ही वाह्य सुविधाएं बहाल कर दी जाएगी।
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नगर के मलीन बस्तियों में रहने वाले गरीबों, झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए सरकार की तरफ से वर्ष 2009 में आईएचएसडीपी शुरू किया गया। इसके तहत लाभार्थी को 2.25 लाख रुपये की लागत से मकान बनाने की जिम्मेदारी सीएनजीएस को सौंपी गई। योजना के लाभार्थियों पर नजर डाला जाए तो कोल्हाड़ में 246, छोटी बकवल मेें 36, बड़ी बकवल में 16, ताजोप़ुर डांड़ेपार में 46, ताजोपुर तिरबन्नी में 30 सहित 374 लाभार्थी शामिल हैं। इन आवासीय योजनाओं को पांच साल में ही पूरा कर लाभार्थियों को आवंटित करना था,लेकिन धन के अभाव में पूरा नहीं हो सका। फिर हर हाल में 30 नवंबर तक परियोजनाओं को पूरा करने के लिए शासन ने लाभार्थियों को आवास आवंटन शुरू करने का निर्देश दिया गया था। अब इस वर्ष निर्माण कार्य पूरा होने से 374 लोगों को सिर छिपाने की जगह मिली। वहीं माया शासनकाल में शुरू हुई काशी राम आवास योजना के तहत वर्षो पूर्व 948 आवास बनकर तैयार हैं। लेकिन बजट के अभाव में वाह्य सुविधाएं बहाल नहीं की जा सकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो वाह्य सुविधाएं बहाल करने के लिए पांच करोड़ के धन की व्यवस्था कर ली गई है। भीषण ठंड के मौसम में आवास होने के बाद भी आवंटन न होने से गरीबों को खुले आसमान में जीवन यापन करना पड़ रहा है। इस बाबत डूडा अधिकारी हरेराम यादव का कहना है कि आईएचएसडीपी के तहत 374 मकान आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं कांशी राम आवासीय योजना के तहत बने आवासों में शीघ्र ही वाह्य सुविधाएं बहाल कर दी जाएगी।
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