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दीवानी कचहरी में गोष्ठी का हुआ आयोजन
Updated Thu, 27 Jul 2017 12:42 AM IST
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मऊ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में बुधवार को दीवानी कचहरी के सभागार में मानवाधिकार तथा संवैधानिक अधिकार, मानव तस्करी, प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड फार सैक्शुअल आफेंस विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि वह अधिकार जिसके बिना मानव जीवन की कल्पना नही की जा सकती है, वह मानवाधिकार है।
जिला जज राजेंद्र कुमार ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि यह कंप्यूटर का युग है। वादकारी अपने मामलों की सूचना और उसमें पारित निर्णय और कार्यवाहियों की जानकारी घर बैठे मोबाइल अथवा कंप्यूटर से प्राप्त कर लें इस दिशा में पूरा प्रयास जारी है। दीवानी कचहरी में जितने मामले लंबित है, उनकी अग्रिम तिथि क्या है। तथा मामले में आदेश और निर्णय वेबसाइट पर अपलोड हो रहा है। इस बात की जानकारी वादकारियों को दिया जाना हमारा कर्तव्य है।
अपर जिला जज डा. अजय कुमार ने कहा कि मानवाधिकार के बिना इंसान के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। आम लोग अपने-अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो जाएं तो बच्चों के अपहरण से लेकर तमाम घटनाए रोकी जा सकती है। आगे कहा कि ईको प्रोजेक्ट शुुरु किया गया है। ताकि वादकारियों को उनके मामलों की पूर्ण जानकारी वेबसाइट के माध्यम प्राप्त हो सके। उन्होनें लोगों से वेबसाइट का उपयोग करने की सलाह दी। एडीजे वीरनायक सिंह ने कहा कि कहा कि संवैधानिक अधिकारों से अधिक मानवाधिकार है। कहा कि अधिकारो का ऐसा समूह जो मानव जीवन के सर्वांगीण विकास व आजीविका के लिए जितने आवश्यक है। वह मानवाधिकार के तहत आता है। इस संबंध में लोगों की जागरुकता पर बल दिया। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय बहादुर पांडेय ने मानवाधिकार के बारे में लोगों को जानकारी दी। गोष्ठी में एडीजे लालचंद गुप्ता, एडीजे आदिल आफताब अहमद,एडीजे मोहम्मद गजाली सिविल जज हेमंत कुशवाहा, सिविल जज प्रवींद्र कुमार, मुंसिफ सदर कृष्ण कुमार, नदीम अनवर, बलवंत भारती , हरिकेश मौर्या, सत्येंद्रनाथ राय, शमसुल हसन,रुद्रा मिश्रा, विनोद तिवारी आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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जिला जज राजेंद्र कुमार ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि यह कंप्यूटर का युग है। वादकारी अपने मामलों की सूचना और उसमें पारित निर्णय और कार्यवाहियों की जानकारी घर बैठे मोबाइल अथवा कंप्यूटर से प्राप्त कर लें इस दिशा में पूरा प्रयास जारी है। दीवानी कचहरी में जितने मामले लंबित है, उनकी अग्रिम तिथि क्या है। तथा मामले में आदेश और निर्णय वेबसाइट पर अपलोड हो रहा है। इस बात की जानकारी वादकारियों को दिया जाना हमारा कर्तव्य है।
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अपर जिला जज डा. अजय कुमार ने कहा कि मानवाधिकार के बिना इंसान के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। आम लोग अपने-अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो जाएं तो बच्चों के अपहरण से लेकर तमाम घटनाए रोकी जा सकती है। आगे कहा कि ईको प्रोजेक्ट शुुरु किया गया है। ताकि वादकारियों को उनके मामलों की पूर्ण जानकारी वेबसाइट के माध्यम प्राप्त हो सके। उन्होनें लोगों से वेबसाइट का उपयोग करने की सलाह दी। एडीजे वीरनायक सिंह ने कहा कि कहा कि संवैधानिक अधिकारों से अधिक मानवाधिकार है। कहा कि अधिकारो का ऐसा समूह जो मानव जीवन के सर्वांगीण विकास व आजीविका के लिए जितने आवश्यक है। वह मानवाधिकार के तहत आता है। इस संबंध में लोगों की जागरुकता पर बल दिया। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय बहादुर पांडेय ने मानवाधिकार के बारे में लोगों को जानकारी दी। गोष्ठी में एडीजे लालचंद गुप्ता, एडीजे आदिल आफताब अहमद,एडीजे मोहम्मद गजाली सिविल जज हेमंत कुशवाहा, सिविल जज प्रवींद्र कुमार, मुंसिफ सदर कृष्ण कुमार, नदीम अनवर, बलवंत भारती , हरिकेश मौर्या, सत्येंद्रनाथ राय, शमसुल हसन,रुद्रा मिश्रा, विनोद तिवारी आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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