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सातवें आसमान पर पहुंचा परशुराम का क्रोध
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मझवारा। घोसी तहसील क्षेत्र के बाजार स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में गुरुवार को धनुष यज्ञ सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान राम के धनुष तोड़ते ही जयश्रीराम के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा। जबकि धनुष के टूटते ही परशुराम का क्रोध सातवें आसमान पर जा पहुंचा।
रामलीला में राजा जनक की नगरी में आयोजित माता सीता के स्वयंवर में विश्वामित्र के साथ भगवान राम, लक्ष्मण के पहुंचे। आकाश मार्ग से यहां आने वाले लंका के राजा रावण, बाणासुर ने अपना परिचय दिया। लंकेश रावण धनुष उठाने का प्रयास करता है पर इतने में आकाशवाणी हुई की उसकी पुत्री को शुभनिशि दानव लेकर जा रहा है। यह सुनते ही लंकापति स्वयंवर से वापस लंका चला जाता है। अन्य राजा भी धनुष उठाने का प्रयास करते हैं पर उसे हिला भी नहीं पाते हैं। राजा जनक निराश हो उठते हैं।महर्षि विश्वामित्र के संकेत मात्र पर प्रभु श्रीराम धनुष के पास पहुंचते हैं। स्पर्श मात्र से ही शिव धनुष खंडित हो जाता है और भयंकर गर्जना होती है। धनुष टूटते ही दर्शकों के जयश्रीराम के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा। धनुष टूटते ही भगवान परशुराम क्रोध जताते हैं।
यहां लक्ष्मण के उकसावे वाले बोल सुनते ही परशुराम का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। यहां लक्ष्मण परशुराम संवाद प्रारंभ हुआ तो मेला परिसर में बैठे दर्शकों ने ज्ञान और क्रोध के वार्तालाप का खूब आनंद उठाया। अंत में नारायण अवतार प्रभुराम को पहचान लेते हैं और अपना धनुष देकर हिमालय को लौट जाते हैं। इस दौरान अरविंद राय आचार्य, शैलेश राय, अनिल राय, अरुण राय, राजेंद्र राय, सुशील राय, नवनीत राय, राकेश कुमार गुप्ता, डॉ. संजय राजभर, सुनील कन्नौजिया, रामायन वर्मा आदि मौजूद रहे।
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रामलीला में राजा जनक की नगरी में आयोजित माता सीता के स्वयंवर में विश्वामित्र के साथ भगवान राम, लक्ष्मण के पहुंचे। आकाश मार्ग से यहां आने वाले लंका के राजा रावण, बाणासुर ने अपना परिचय दिया। लंकेश रावण धनुष उठाने का प्रयास करता है पर इतने में आकाशवाणी हुई की उसकी पुत्री को शुभनिशि दानव लेकर जा रहा है। यह सुनते ही लंकापति स्वयंवर से वापस लंका चला जाता है। अन्य राजा भी धनुष उठाने का प्रयास करते हैं पर उसे हिला भी नहीं पाते हैं। राजा जनक निराश हो उठते हैं।महर्षि विश्वामित्र के संकेत मात्र पर प्रभु श्रीराम धनुष के पास पहुंचते हैं। स्पर्श मात्र से ही शिव धनुष खंडित हो जाता है और भयंकर गर्जना होती है। धनुष टूटते ही दर्शकों के जयश्रीराम के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा। धनुष टूटते ही भगवान परशुराम क्रोध जताते हैं।
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यहां लक्ष्मण के उकसावे वाले बोल सुनते ही परशुराम का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। यहां लक्ष्मण परशुराम संवाद प्रारंभ हुआ तो मेला परिसर में बैठे दर्शकों ने ज्ञान और क्रोध के वार्तालाप का खूब आनंद उठाया। अंत में नारायण अवतार प्रभुराम को पहचान लेते हैं और अपना धनुष देकर हिमालय को लौट जाते हैं। इस दौरान अरविंद राय आचार्य, शैलेश राय, अनिल राय, अरुण राय, राजेंद्र राय, सुशील राय, नवनीत राय, राकेश कुमार गुप्ता, डॉ. संजय राजभर, सुनील कन्नौजिया, रामायन वर्मा आदि मौजूद रहे।
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