{"_id":"5bfd71ebbdec2241540079cf","slug":"51543336427-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधानों की अनुपस्थिति से एसडीएम नाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधानों की अनुपस्थिति से एसडीएम नाराज
Updated Tue, 27 Nov 2018 10:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मधुबन। खसरा-रुबेला से बचाव के लिए 10 दिसंबर से शुरू टीकाकरण अभियान की तैयारियों को लेकर एसडीएम निरंकार सिंह की अध्यक्षता में ग्राम प्रधानों सहित विभागीय अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में ब्लॉक के 75 गांवों में केवल 15 गांवों के केवल ग्राम प्रधान मौजूद रहे। ज।िस पर एसडीएम ने काफी नराज दिखे और अनुपस्थित ग्राम प्रधानों द्वारा दुबारा बैठक में गायब होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
बैठक में खसरे एवं रुबैला बीमारी के विषय में जानकारी देते हुए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि खसरा और रुबैला के लक्षण क्या हैं? खसरा एक जानलेवा रोग है यह वायरस से फैलता है। इससे बच्चों में विकलांगता या असमय मृत्यु हो जाती है। चेहरे तथा शरीर पर गुलाबी लाल दाने, अत्यधिक बुखार, खांसी, नाक बहना आदि इसके लक्षण हैं। रुबैला में बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है। जिसमें कम डिग्री का बुखार, मिचली, हल्के नेत्र शोध के लक्षण दिखायी पड़ते हैं। संक्रमित वयस्क ज्यादातर महिलाओं में जोड़ों में पीड़ा हो सकती है। यह वायरस लड़के और लड़कियों दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसके रोकथाम के लिए जिले में 10 दिसंबर 2018 से टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। जिसमें 09 माह से लेकर 15 वर्ष के बच्चों को रोग से बचाव के लिए टीका लगाया जाएगा। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिससे अभियान को सफल बनाया जा सके। बैठक में बलवंत सिंह ,श्यामनारायण सिंह, सुनील कुमार , रामगरीब यादव ,टिंकल तिवारी ,संजय चौहान आदि रहे ।
विज्ञापन
बैठक में खसरे एवं रुबैला बीमारी के विषय में जानकारी देते हुए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि खसरा और रुबैला के लक्षण क्या हैं? खसरा एक जानलेवा रोग है यह वायरस से फैलता है। इससे बच्चों में विकलांगता या असमय मृत्यु हो जाती है। चेहरे तथा शरीर पर गुलाबी लाल दाने, अत्यधिक बुखार, खांसी, नाक बहना आदि इसके लक्षण हैं। रुबैला में बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है। जिसमें कम डिग्री का बुखार, मिचली, हल्के नेत्र शोध के लक्षण दिखायी पड़ते हैं। संक्रमित वयस्क ज्यादातर महिलाओं में जोड़ों में पीड़ा हो सकती है। यह वायरस लड़के और लड़कियों दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसके रोकथाम के लिए जिले में 10 दिसंबर 2018 से टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। जिसमें 09 माह से लेकर 15 वर्ष के बच्चों को रोग से बचाव के लिए टीका लगाया जाएगा। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिससे अभियान को सफल बनाया जा सके। बैठक में बलवंत सिंह ,श्यामनारायण सिंह, सुनील कुमार , रामगरीब यादव ,टिंकल तिवारी ,संजय चौहान आदि रहे ।
विज्ञापन