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बदहाल पड़ा है मझवारा का राजकीय पशु चिकित्सालय
Updated Tue, 18 Sep 2018 11:12 PM IST
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घोसी ब्लाक क्षेत्र के मझवारा बाजार स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय बदहाल पड़ा है। यहां सुविधाओं का अभाव है। दवाओं का हमेशा टोंटा रहता है। पशु चिकित्साधिकारी तथा कर्मचारियों का आवास खंडहर में तब्दील हो गया है। पशु चिकित्सकों के लिए आवासीय सुविधा न होने के चलते पशुपालकों को तमाम समस्याओं से सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। पशु अस्पताल की बाउंड्री न होने से छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। लोगों ने आला अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
घोसी ब्लाक क्षेत्र के राजकीय पशु चिकित्सालय की दशकों पूर्व स्थापना हुई तो पशुपालकों को बेहतर सुविधा की आस जगी, लेकिन उनके विभागीय उदासीनता से उनके सपनों पर ग्रहण लग गया है। पशु अस्पताल का भवन जर्जर हाल में है। अस्पताल की बाउंड्री न होने से छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। अस्पताल में दवाओं का टोंटा रहता है। फार्मासिस्ट का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
पशु चिकित्साधिकारी का आवासीय भवन खंडहर में तब्दील हो गया है। आवासीय सुविधा न होने से शाम के बाद पशु चिकित्सक की उपलब्धता न होने से पशुपालकों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के पशुपालक अभिषेक यादव, सुरेंद्र सिंह, जयप्रकाश यादव, सत्यराम शर्मा, महेंद्र नाथ का कहना है कि पशु अस्पताल में हमेशा दवाओं का अकाल रहता है। पशुओं के इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों की कमी से पशुओं का टीकाकरण तक नहीं हो पाता है। अपराह्न दो बजे के बाद पशु चिकित्सकों की उपलब्धता न होने से निजी पशु चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। इस बाबत पशु चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस अली का कहना है कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है।
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घोसी ब्लाक क्षेत्र के राजकीय पशु चिकित्सालय की दशकों पूर्व स्थापना हुई तो पशुपालकों को बेहतर सुविधा की आस जगी, लेकिन उनके विभागीय उदासीनता से उनके सपनों पर ग्रहण लग गया है। पशु अस्पताल का भवन जर्जर हाल में है। अस्पताल की बाउंड्री न होने से छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। अस्पताल में दवाओं का टोंटा रहता है। फार्मासिस्ट का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
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पशु चिकित्साधिकारी का आवासीय भवन खंडहर में तब्दील हो गया है। आवासीय सुविधा न होने से शाम के बाद पशु चिकित्सक की उपलब्धता न होने से पशुपालकों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के पशुपालक अभिषेक यादव, सुरेंद्र सिंह, जयप्रकाश यादव, सत्यराम शर्मा, महेंद्र नाथ का कहना है कि पशु अस्पताल में हमेशा दवाओं का अकाल रहता है। पशुओं के इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों की कमी से पशुओं का टीकाकरण तक नहीं हो पाता है। अपराह्न दो बजे के बाद पशु चिकित्सकों की उपलब्धता न होने से निजी पशु चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। इस बाबत पशु चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस अली का कहना है कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है।
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