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मीटर रीडर एजेंसी से विभाग वसूलेगा 4.82 लाख
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मऊ। जिले का बिजली विभाग संभवत: प्रदेेश का पहला जिला होगा जो मीटर रीडिंग में मीटर रीडर व संबंधित एजेंसी की मिलीभगत से सरकारी राजस्व का चपत लगाने पर मीटर रीडरों पर कड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। बिजली विभाग की टीम ने जांच में 15 उपभोक्ताओं के यहां हर माह बिल जमा करने के बाद उनके मीटर में तीन माह का स्टोर रीडिंग मिलने पर इस संबंध में मीटर रीडिंग एजेंसी से वसूली के लिए एक्सईएन ने विभाग को पत्र लिखा है। जिसमें स्टोर रीडिंग के चार लाख से ज्यादा रुपये का बिल का कटौती एजेंसी से करने की मांग की है। साथ ही मीटर रीडरों की इस रवैया से उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी तथा शासन का राजस्व के नुकसान को अवगत कराते हुए कड़ी कार्रर्वाई की मांग की है।
बीते 15 अक्तूबर 2020 को मुख्य अभियंता वितरण आजमगढ़ को भेजे गए पत्र में अधिशाषी अभियंता सुबोध कुमार ने लिखा है कि अवर अभियंता तथा उपखंड अधिकारियों द्वारा बिजली बकाया अभियान को लेकर जांच में 15 उपभोक्ताओं के यहां स्थापित मीटर में तीन माह से अधिक समय का रीडिंग स्टोर पाया गया है। जिसमें शासन को चार लाख 82 हजार 350 रुपये का राजस्व का नुकसान हुआ। वहीं अचानक एक साथ बड़ी राशि के चलते उपभोक्ताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जिसका खमियाजा आए दिन बिजली विभाग कार्यालय पर उपभोक्ताओं के आक्रोश के रूप में देखने को मिल रहा है।
एक्सईएन सुबोध कुमार ने बिलिंग एजेंसी के बीजक से मीटर स्टोर की राशि 4 लाख 82 हजार 350 रुपये की कटौती करने की संस्तुति की मांग की है। उधर एक्सईएन के इस सख्त रवैया के चलते जहां मीटर रीडरों में हड़कंप की स्थिति बनी है। सूत्रों की माने तो उनके द्वारा मीटर में स्टोर रीडिंग का बिल निकालने की कवायद युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इस बाबत एक्सईएन सुबोध कुमार का कहना है कि रीडिंग स्टोर मिलने पर आला अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। साथ ही बिलिंग एजेंसी से स्टोर रीडिंग की वसूली की मांग की गई है।
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स्टोर रीडिंग ने बढ़ाया उपभोक्ताओं का बीपी
मऊ। स्टोर रीडिंग ने कई उपभोक्ताओं का बीपी बढ़ा दिया है। विभाग ने जिन उपभोक्ताओं के स्टोर रीडिंग का ब्योरा मुख्य अभियंता वितरण को भेजा है। इसमें तो एक उपभोक्ता पर 99 हजार रुपये की देनदारी है तो एक पर 81 हजार तो एक पर 78 हजार रुपये की। 15 उपभोक्ताओं में सबसे कम राशि 11 हजार 1852 रुपये है।
क्या होता है स्टोर मीटर रीडिंग
मऊ। अधिकारियों के मुताबिक बिजली मीटरों की रीडिंग को बिल में हर महीने छिपाया जा सकता है, लेकिन घरों में बिजली खर्च के हिसाब से रीडिंग हर महीने मीटर में स्टोर होती रहती है। जबकि मीटर रीडर हर माह आईडीएफ बिलों की रीडिंग जारी करते रहते हैं। इससे एक अंतराल के बाद उपभोक्ताओं के घरों के बिजली बिल अचानक उसके खर्च के कई गुना ज्यादा आ जाते हैं। कई मीटर रीडर बिना गए अनुमानित बिल निकालते है, इसकी भी एक वजह स्टोर रीडिंग की है। सूत्रों की माने तो कुछ मीटर रीडर तो स्टोर रीडिंग से बचाने के लिए मीटरों को जला दिखाकर नया मीटर लगवाया दिया जाता है। इससे विभाग के राजस्व को भी लाखों का नुकसान हो रहा है।
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बीते 15 अक्तूबर 2020 को मुख्य अभियंता वितरण आजमगढ़ को भेजे गए पत्र में अधिशाषी अभियंता सुबोध कुमार ने लिखा है कि अवर अभियंता तथा उपखंड अधिकारियों द्वारा बिजली बकाया अभियान को लेकर जांच में 15 उपभोक्ताओं के यहां स्थापित मीटर में तीन माह से अधिक समय का रीडिंग स्टोर पाया गया है। जिसमें शासन को चार लाख 82 हजार 350 रुपये का राजस्व का नुकसान हुआ। वहीं अचानक एक साथ बड़ी राशि के चलते उपभोक्ताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जिसका खमियाजा आए दिन बिजली विभाग कार्यालय पर उपभोक्ताओं के आक्रोश के रूप में देखने को मिल रहा है।
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एक्सईएन सुबोध कुमार ने बिलिंग एजेंसी के बीजक से मीटर स्टोर की राशि 4 लाख 82 हजार 350 रुपये की कटौती करने की संस्तुति की मांग की है। उधर एक्सईएन के इस सख्त रवैया के चलते जहां मीटर रीडरों में हड़कंप की स्थिति बनी है। सूत्रों की माने तो उनके द्वारा मीटर में स्टोर रीडिंग का बिल निकालने की कवायद युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इस बाबत एक्सईएन सुबोध कुमार का कहना है कि रीडिंग स्टोर मिलने पर आला अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। साथ ही बिलिंग एजेंसी से स्टोर रीडिंग की वसूली की मांग की गई है।
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स्टोर रीडिंग ने बढ़ाया उपभोक्ताओं का बीपी
मऊ। स्टोर रीडिंग ने कई उपभोक्ताओं का बीपी बढ़ा दिया है। विभाग ने जिन उपभोक्ताओं के स्टोर रीडिंग का ब्योरा मुख्य अभियंता वितरण को भेजा है। इसमें तो एक उपभोक्ता पर 99 हजार रुपये की देनदारी है तो एक पर 81 हजार तो एक पर 78 हजार रुपये की। 15 उपभोक्ताओं में सबसे कम राशि 11 हजार 1852 रुपये है।
क्या होता है स्टोर मीटर रीडिंग
मऊ। अधिकारियों के मुताबिक बिजली मीटरों की रीडिंग को बिल में हर महीने छिपाया जा सकता है, लेकिन घरों में बिजली खर्च के हिसाब से रीडिंग हर महीने मीटर में स्टोर होती रहती है। जबकि मीटर रीडर हर माह आईडीएफ बिलों की रीडिंग जारी करते रहते हैं। इससे एक अंतराल के बाद उपभोक्ताओं के घरों के बिजली बिल अचानक उसके खर्च के कई गुना ज्यादा आ जाते हैं। कई मीटर रीडर बिना गए अनुमानित बिल निकालते है, इसकी भी एक वजह स्टोर रीडिंग की है। सूत्रों की माने तो कुछ मीटर रीडर तो स्टोर रीडिंग से बचाने के लिए मीटरों को जला दिखाकर नया मीटर लगवाया दिया जाता है। इससे विभाग के राजस्व को भी लाखों का नुकसान हो रहा है।